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मुंबई। मुंबई के बहुप्रतीक्षित गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) प्रोजेक्ट ने विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तहत संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे बनने वाली जुड़वां सुरंगों में से एक की खुदाई का काम शुरू हो गया है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘तुलसी’ के सफल संचालन के साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने एक नए चरण में प्रवेश कर लिया है।
मुंबई के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ने वाली इस परियोजना को शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। गोरेगांव ईस्ट को मुलुंड वेस्ट से जोड़ने वाली ये सुरंगें शहर के दो प्रमुख हिस्सों के बीच यात्रा के समय को कम करने में मदद करेंगी।
5.30 किलोमीटर लंबी होंगी जुड़वां सुरंगें
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के फेज-3(B) के तहत बनाई जा रही इन जुड़वां सुरंगों की लंबाई करीब 5.30 किलोमीटर होगी। प्रत्येक सुरंग तीन लेन वाली होगी, जिससे बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही आसान हो सकेगी।
यह सुरंग गोरेगांव ईस्ट स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी क्षेत्र को मुलुंड वेस्ट के अमर नगर से जोड़ेगी। परियोजना पूरी होने के बाद यह मुंबई के लिए एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के रूप में काम करेगी।
वर्तमान समय में मुंबई के पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच आवागमन के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। खासकर पीक ऑवर में भारी ट्रैफिक के कारण यात्रियों को काफी समय सड़कों पर बिताना पड़ता है। GMLR परियोजना के पूरा होने से इस समस्या में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक से हो रही सुरंग की खुदाई
संजय गांधी नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र के नीचे सुरंग निर्माण एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है। इस चुनौती को देखते हुए परियोजना में आधुनिक टनलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
टनल बोरिंग मशीन ‘तुलसी’ को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि जमीन के अंदर सुरक्षित तरीके से खुदाई की जा सके और सतह पर मौजूद पर्यावरणीय संरचना पर कम से कम प्रभाव पड़े।
अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक से सुरंग निर्माण के दौरान कंपन, जमीन के बदलाव और पर्यावरणीय नुकसान को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे संजय गांधी नेशनल पार्क की जैव-विविधता को भी सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान
संजय गांधी नेशनल पार्क मुंबई का एक महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में वनस्पतियां और वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र के नीचे सुरंग बनाना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
परियोजना तैयार करते समय पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से निर्माण कार्य को इस तरह आगे बढ़ाया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
सुरंग का निर्माण जमीन के काफी नीचे किया जा रहा है, जिससे पार्क के ऊपरी हिस्से और वहां मौजूद प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखा जा सके।
मुंबई के ट्रैफिक को मिलेगी राहत
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में ट्रैफिक एक बड़ी समस्या है। खासकर पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों के बीच यात्रा करने वाले लोगों को रोजाना जाम का सामना करना पड़ता है।
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के पूरा होने के बाद लोगों को एक वैकल्पिक तेज मार्ग उपलब्ध होगा। इससे यात्रा का समय कम होगा और मौजूदा सड़कों पर वाहनों का दबाव भी घटेगा।
यह परियोजना केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई के भविष्य के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शहर के विकास को मिलेगी नई दिशा
GMLR परियोजना मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की बड़ी योजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से पश्चिमी उपनगरों को पूर्वी हिस्सों से सीधे जोड़ा जाएगा।
इस परियोजना से व्यापार, रोजगार और आवागमन के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो सकती हैं।
परियोजना पर बढ़ी निगरानी
सुरंग निर्माण जैसे बड़े कार्य में सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम लगातार निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है।
TBM ‘तुलसी’ के शुरू होने के बाद परियोजना की गति बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले समय में दूसरी सुरंग के निर्माण कार्य को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना मुंबई के लिए केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य की बेहतर कनेक्टिविटी और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे सुरक्षित और आधुनिक तकनीक से बन रही ये सुरंगें आने वाले वर्षों में मुंबई की परिवहन व्यवस्था को नई पहचान दे सकती हैं।





