महाराष्ट्र

हिंदुओं पर हिंसा के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन, बजरंग दल नेता नितिन महाजन का बड़ा बयान

SHIDDHANT
23 Dec 2025 10:41 PM IST
हिंदुओं पर हिंसा के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन, बजरंग दल नेता नितिन महाजन का बड़ा बयान
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Maharashtra महाराष्ट्र। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रही कथित हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया है। इस क्रम में पुणे में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के नेता नितिन महाजन ने बांग्लादेश की स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए। नितिन महाजन ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा कोई हालिया घटना नहीं है, बल्कि यह पिछले एक वर्ष से लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां बचे हुए हिंदू समुदाय को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। कभी धर्मांतरण के नाम पर, तो कभी झूठे आरोपों के आधार पर हमले किए जा रहे हैं। कई मामलों में हिंदुओं की हत्या, उनके घरों और मंदिरों को नुकसान पहुंचाने तथा महिलाओं और यहां तक कि नाबालिग लड़कियों के साथ यौन हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं।

महाजन ने कहा कि यह केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के अस्तित्व पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय भय के माहौल में जीने को मजबूर है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल पूरे भारत में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार को कूटनीतिक स्तर पर बांग्लादेश सरकार से सख्त बातचीत करनी चाहिए, ताकि वहां हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

पुणे में निकाले गए विरोध मार्च में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर बांग्लादेश में कथित अत्याचारों के खिलाफ नारे लगाए। आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताया और कहा कि उनका उद्देश्य किसी देश या समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं, बल्कि पीड़ित हिंदुओं के लिए न्याय और सुरक्षा की मांग करना है। नितिन महाजन ने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में यह संकट और गहराता जाएगा। उन्होंने भारत सहित विश्व समुदाय से अपील की कि वे धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।
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