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ओमान के साथ CEPA लागू होने से नासिक के प्याज निर्यात को बड़ा फायदा

Maharashtra महाराष्ट्र: नासिक जिले के लाखों प्याज उत्पादकों और निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। भारत और ओमान के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) 1 जून 2026 से लागू होने के साथ ही भारतीय प्याज को ओमानी बाजार में 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल गया है। इस फैसले से नासिक के प्याज को एक स्थायी और मजबूत निर्यात बाजार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस नए समझौते के लागू होने के बाद ओमान में भारतीय प्याज की कीमत अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगी, जिससे वहां आयातकों की मांग बढ़ने की संभावना है। बढ़ती मांग का सीधा लाभ नासिक के किसानों और निर्यातकों को मिलेगा, जो भारत के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं।
कृषि और व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारतीय प्याज निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अब तक निर्यातकों को खाड़ी देशों में प्याज भेजने के दौरान कई तरह की लॉजिस्टिक और लागत संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, जिसमें परिवहन लागत और ट्रांजिट समय प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
हालांकि, ओमान की अरब सागर के किनारे स्थित रणनीतिक भौगोलिक स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा लाभ प्रदान करती है। मुंबई पोर्ट से भेजे गए प्याज के कंटेनर लगभग 48 घंटे में ओमान पहुंच सकते हैं। इससे न केवल परिवहन लागत कम होगी, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और ताजगी भी बेहतर बनी रहेगी।
निर्यातकों का मानना है कि समय पर डिलीवरी और कम लॉजिस्टिक खर्च के कारण ओमान भारतीय प्याज के लिए एक महत्वपूर्ण और स्थिर बाजार के रूप में उभर सकता है। इससे नासिक क्षेत्र के किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर और स्थिर कीमत मिलने की उम्मीद है।
किसान संगठनों ने इस विकास का स्वागत करते हुए कहा है कि लंबे समय से प्याज उत्पादक मूल्य अस्थिरता और बाजार की अनिश्चितता से जूझ रहे थे। ऐसे में यह समझौता उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर अवसर प्रदान कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निर्यात व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही, तो आने वाले वर्षों में नासिक के प्याज निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि भारत के कृषि निर्यात को भी मजबूती मिलेगी।
इस प्रकार CEPA समझौते के तहत ओमान में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से नासिक के प्याज उद्योग को नई दिशा मिलने की संभावना है, जिससे किसान, व्यापारी और निर्यातक सभी को लाभ मिलने की उम्मीद है।





