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नासिक अस्पतालों पर फर्जी क्लेम का आरोप, ₹1.79 करोड़ घोटाले की जांच शुरू

मुंबई: गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के नासिक जिले के तीन निजी अस्पतालों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ऐसे मरीजों के नाम पर फर्जी इलाज के दावे (क्लेम) जमा किए, जिन्हें वास्तव में इलाज मिला ही नहीं था।
आरोप है कि इन अस्पतालों ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत करीब ₹1.79 करोड़ (₹17.943 मिलियन) की राशि का गलत तरीके से दावा किया। मामले में पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की शिकायत के बाद मुंबई की वर्ली पुलिस ने तीनों अस्पतालों से जुड़े पांच पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में जांच शुरू कर दी गई है और आरोपों से जुड़े दस्तावेजों, क्लेम रिकॉर्ड और अन्य जानकारियों की जांच की जा रही है।
तीन निजी अस्पताल जांच के घेरे में
पुलिस के अनुसार, जिन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, उनमें शिव मल्टीस्पेशलिटी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल, नासिक ग्रेस हॉस्पिटल और ऋषिकेश हॉस्पिटल शामिल हैं।
इन अस्पतालों पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत ऐसे मरीजों के नाम से इलाज के बिल और क्लेम प्रस्तुत किए, जिनके इलाज को लेकर संदेह पाया गया।
पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से की गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने अस्पतालों से जुड़े पांच पदाधिकारियों को आरोपी बनाया है। हालांकि, मामले में जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सरकारी योजनाओं के क्लेम में मिली गड़बड़ी
महाराष्ट्र में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज की सुविधा देने के लिए कई सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं के तहत मरीजों के इलाज का खर्च सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से वहन किया जाता है। अस्पतालों द्वारा इलाज के बाद ऑनलाइन माध्यम से क्लेम जमा किए जाते हैं।
जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं के बिल मुंबई के वर्ली स्थित जीवनदायी भवन के माध्यम से प्रोसेस किए जाते हैं। कुछ क्लेम में अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जीवनदायी पोर्टल के माध्यम से जमा किए गए क्लेम की विस्तृत जांच और ऑडिट का आदेश दिया।
ऑडिट के दौरान सामने आईं अनियमितताएं
सरकार द्वारा कराए गए ऑडिट में कुछ ऐसे क्लेम सामने आए जिन पर सवाल उठे। जांच में यह आशंका जताई गई कि कुछ मरीजों के नाम पर इलाज दिखाकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिश की गई।
पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद वर्ली पुलिस ने संबंधित अस्पतालों और उनके पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी क्लेम किस तरह तैयार किए गए, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी राशि का कितना नुकसान हुआ।
स्वास्थ्य योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजनाओं में किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी को गंभीर माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित ऑडिट, डिजिटल निगरानी और सख्त जांच व्यवस्था जरूरी है।
सरकार भी समय-समय पर योजनाओं के तहत किए गए भुगतान और अस्पतालों के दावों की समीक्षा करती है ताकि गलत तरीके से धन का उपयोग रोका जा सके।
पुलिस जांच जारी
वर्ली पुलिस ने मामले में प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर लिया है। अब जांच के दौरान अस्पतालों के रिकॉर्ड, मरीजों की जानकारी, इलाज से जुड़े दस्तावेज और क्लेम प्रक्रिया की जांच की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी व्यवस्था और निजी अस्पतालों द्वारा किए जाने वाले क्लेम की जांच प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गरीब मरीजों के लिए बनाई गई योजनाओं में किसी भी तरह की धोखाधड़ी से न केवल सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि जरूरतमंद लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी असर पड़ता है।





