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चार दशक बाद हत्या आरोपी गिरफ्तार, अंपायर हमले का आरोपी भी पकड़ा

मुंबई। मुंबई पुलिस ने अलग-अलग मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे दो आरोपियों को कई दशकों बाद गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि दोनों ने कथित अपराध उस समय किए थे, जब वे किशोर या युवा उम्र में थे। साकीनाका पुलिस ने वर्ष 1986 के हत्या मामले में करीब चार दशक से फरार 59 वर्षीय सुरेश चंद्र अदागले को गिरफ्तार किया है। वहीं, बोरीवली पुलिस ने 36 साल पुराने मामले में क्रिकेट अंपायर पर बल्ले से हमला करने के आरोपी को भी पकड़ लिया। दोनों मामलों में पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।
1986 के हत्या मामले में करीब 40 साल बाद गिरफ्तारी
साकीनाका पुलिस ने 20 अगस्त को पुणे जिले की शिरूर तहसील स्थित रंजनगांव से सुरेश चंद्र अदागले को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, अदागले वर्ष 1986 में एक मामूली विवाद के दौरान अपने एक साथी की कथित हत्या के मामले में आरोपी था। घटना के समय उसकी उम्र करीब 19 वर्ष थी। वारदात के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था और मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद अदागले को जमानत मिल गई थी। जमानत की शर्तों में उसे अदालत की सुनवाई में नियमित रूप से उपस्थित होना था। शुरुआत में वह अदालत में पेश होता रहा, लेकिन बाद में उसने सुनवाई में आना बंद कर दिया। लगातार अनुपस्थित रहने के बाद अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अदागले पुलिस की पकड़ से बाहर हो गया। इसके बाद उसने अपना ठिकाना बदल लिया और करीब चार दशकों तक पुलिस को उसका कोई पता नहीं चला। समय बीतने के साथ मामला पुराना होता गया, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ जारी वारंट बना रहा।
मजदूरी कर रहा था आरोपी
करीब 40 साल बाद पुलिस को आरोपी के बारे में जानकारी मिली। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अदागले पुणे जिले के रंजनगांव इलाके में रह रहा है और वहां मजदूरी करता है। इसके बाद साकीनाका पुलिस की टीम ने उसकी गतिविधियों की पुष्टि की और 20 अगस्त को उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने पुराने मामले से जुड़े दस्तावेज और अदालत के रिकॉर्ड खंगालने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की। करीब चार दशक तक पुलिस से बचने के बावजूद आरोपी की पहचान और उसके खिलाफ लंबित कानूनी प्रक्रिया रिकॉर्ड में मौजूद थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने लंबे समय तक अपनी पहचान और ठिकाने को लेकर सावधानी बरती। हालांकि, जांच के दौरान उसके वर्तमान ठिकाने का पता लगाया गया और टीम ने वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
बोरीवली पुलिस ने भी 36 साल पुराने मामले का आरोपी पकड़ा
दूसरी ओर, बोरीवली पुलिस ने भी 36 साल पुराने मामले में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर क्रिकेट मैच के दौरान अंपायर पर बल्ले से हमला करने का आरोप है। यह मामला भी उस समय का है, जब आरोपी की उम्र काफी कम थी।
पुलिस के अनुसार, क्रिकेट मैच के दौरान किसी विवाद को लेकर आरोपी ने कथित तौर पर अंपायर पर बल्ले से हमला कर दिया था। घटना के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। लेकिन बाद में वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर हो गया और वर्षों तक उसका कोई पता नहीं चल पाया।
पुराने मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे आरोपियों का रिकॉर्ड दोबारा खंगालना शुरू किया, जिनके खिलाफ लंबे समय से वारंट लंबित थे। इसी प्रक्रिया में बोरीवली पुलिस को 36 साल पुराने क्रिकेट अंपायर हमले के मामले की जानकारी मिली। आरोपी के बारे में उपलब्ध पुराने दस्तावेजों और अन्य सूचनाओं के आधार पर उसकी तलाश शुरू की गई।
पुराने मामलों में आरोपियों की तलाश तेज
मुंबई पुलिस की ओर से लंबे समय से लंबित मामलों और गैर-जमानती वारंट वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत पुलिस पुराने मामलों के रिकॉर्ड को अपडेट कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वर्षों से फरार आरोपी अब कहां रह रहे हैं।
ऐसे मामलों में पुलिस को सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों के पुराने पते और पहचान से जुड़ी जानकारी को वर्तमान स्थिति से जोड़ने में आती है। दशकों के दौरान आरोपी का पता, पेशा और सामाजिक स्थिति बदल सकती है। कई मामलों में आरोपी दूसरे शहर या जिले में जाकर बस जाते हैं और नई जगह पर सामान्य जीवन जीने लगते हैं।
अपराध के समय किशोर या युवा थे दोनों आरोपी
इन दोनों मामलों की एक खास बात यह है कि कथित अपराध के समय आरोपी कम उम्र के थे। साकीनाका मामले में अदागले 19 वर्ष का था, जबकि बोरीवली मामले का आरोपी भी घटना के समय किशोरावस्था में था। हालांकि, वर्षों तक फरार रहने के बाद अब दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस ने लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है।
साकीनाका पुलिस की कार्रवाई विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आरोपी करीब चार दशक तक पुलिस की पहुंच से दूर रहा। वर्ष 1986 का मामला अब लगभग 40 साल पुराना हो चुका है। इसके बावजूद पुलिस ने अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर आरोपी को तलाशकर गिरफ्तार किया।
अब आगे की कानूनी प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पुलिस पुराने रिकॉर्ड, अदालत के आदेश और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाएगी। संबंधित अदालतों में आरोपियों की पेशी के बाद उनके खिलाफ लंबित मामलों की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
मुंबई पुलिस की इन गिरफ्तारियों से यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से लंबित मामलों और फरार आरोपियों की तलाश को लेकर पुलिस पुराने रिकॉर्ड को फिर से सक्रिय कर रही है। दशकों पुराने मामलों में आरोपियों को पकड़ना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इन दोनों मामलों में जांच टीमों ने पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।
चार दशक पुराने हत्या मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और 36 साल पुराने क्रिकेट अंपायर हमले के आरोपी की धरपकड़ से यह भी स्पष्ट है कि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज लंबित मामलों को समय बीतने के बावजूद पूरी तरह बंद नहीं किया जाता। अब दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इन मामलों की कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर आगे बढ़ेगी।





