महाराष्ट्र

फूड सेफ्टी पर मुंढे की सख्ती की तारीफ FSSAI चीफ ने बताया मिसाल

Ratna Netam
2 Sept 2026 6:49 PM IST
फूड सेफ्टी पर मुंढे की सख्ती की तारीफ FSSAI चीफ ने बताया मिसाल
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मुंबई। महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहे महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर और IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को अब देश के शीर्ष खाद्य नियामक का समर्थन मिला है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के CEO रजित पुन्हानी ने मुंढे के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि अगर काम करने की इच्छा हो तो मौजूदा संसाधनों के साथ भी रास्ता निकाला जा सकता है।
रजित पुन्हानी ने खाद्य सुरक्षा विभाग में पोस्टिंग को लेकर बनी उस धारणा को भी खारिज किया, जिसमें इसे कई बार 'पनिशमेंट पोस्टिंग' के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसे वह महत्व मिलना चाहिए जिसका यह हकदार है। उन्होंने हर राज्य में एक समर्पित फूड सेफ्टी कमिश्नर की जरूरत पर भी जोर दिया।
बिना अतिरिक्त कर्मचारियों के कार्रवाई की तारीफ
तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में महाराष्ट्र FDA ने पिछले कुछ महीनों में खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर प्रवर्तन अभियान तेज किया है। रेस्टोरेंट, फूड बिजनेस, गोदाम और अन्य प्रतिष्ठानों में जांच की जा रही है। नियमों के उल्लंघन के मामलों में लाइसेंस निलंबित करने समेत दूसरी कार्रवाई भी हुई है।
FSSAI के CEO को खास तौर पर इस बात ने प्रभावित किया कि मुंढे ने अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती का इंतजार नहीं किया। मौजूदा टीम और उपलब्ध संसाधनों के साथ ही निरीक्षण और कार्रवाई को तेज किया गया।
पुन्हानी ने इसी संदर्भ में कहा कि ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र में इस अभियान के लिए बड़ी संख्या में नए फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। मौजूदा अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही काम किया गया है। उनके मुताबिक, यह दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण हो सकता है कि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करके खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
'फूड सेफ्टी में पोस्टिंग कोई सजा नहीं'
रजित पुन्हानी ने खाद्य सुरक्षा विभाग में अधिकारियों की पोस्टिंग से जुड़ी धारणा पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पहले कई अधिकारी फूड सेफ्टी कमिश्नर बनने में दिलचस्पी नहीं दिखाते थे और इस तरह की पोस्टिंग को कई बार 'पनिशमेंट पोस्टिंग' समझा जाता था।
उनके मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से एक स्थापित व्यवस्था मौजूद है। वहां डॉक्टर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दूसरी व्यवस्थाएं पहले से विकसित हैं। इसके मुकाबले खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक अपेक्षित प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं मिली।
पुन्हानी ने इस सोच में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों तक सुरक्षित भोजन पहुंचाना सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग को कम महत्वपूर्ण समझना सही नहीं है।
हर राज्य में अलग फूड सेफ्टी कमिश्नर की जरूरत
FSSAI CEO ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अब हर राज्य में एक समर्पित फूड सेफ्टी कमिश्नर की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
कई जगह अधिकारियों को खाद्य सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है। ऐसे में विभाग को उतना समय और प्रशासनिक ध्यान नहीं मिल पाता जितना खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय के लिए जरूरी है।
पुन्हानी के मुताबिक, अगर यह जिम्मेदारी इतनी महत्वपूर्ण है तो इसके लिए अलग और समर्पित अधिकारी होना चाहिए। इससे विभाग की जवाबदेही बढ़ने के साथ खाद्य पदार्थों की जांच, नियमों का अनुपालन और उल्लंघन पर कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है।
तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में तेज हुआ अभियान
तुकाराम मुंढे ने मई 2026 में महाराष्ट्र FDA कमिश्नर के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में निरीक्षण और प्रवर्तन पर विशेष जोर दिया है। महाराष्ट्र में रेस्टोरेंट, खाद्य प्रतिष्ठानों, गोदामों और अन्य फूड बिजनेस की बड़े पैमाने पर जांच की गई है।
इन जांचों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
जहां गंभीर कमियां मिलीं, वहां FDA की तरफ से नोटिस, लाइसेंस निलंबन और दूसरी नियामकीय कार्रवाई की गई। इस अभियान के चलते महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा का मुद्दा आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
बड़े नामों तक पहुंची FDA की कार्रवाई
तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसलिए भी सुर्खियों में रही क्योंकि उन्होंने यह संकेत दिया है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे।
अगस्त में महाराष्ट्र FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के एक विज्ञापन से जुड़े मामले में नोटिस जारी किए थे। FDA उस प्रचार की जांच संभावित surrogate advertising के संदर्भ में कर रहा था। उस समय मुंढे ने कहा था कि विज्ञापन तैयार करने, प्रकाशित करने या प्रायोजित करने वाली पूरी श्रृंखला की जिम्मेदारी बनती है और नियम सभी पर लागू होते हैं।
उनका कहना था कि खाद्य सुरक्षा नियमों को लागू करना नियामक संस्था की जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी को अलग तरीके से नहीं देखा जा सकता।
मुख्यमंत्री फडणवीस भी कर चुके हैं समर्थन
FSSAI प्रमुख से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में चल रही कार्रवाई का समर्थन कर चुके हैं।
फडणवीस ने अगस्त में कहा था कि खाद्य पदार्थों में मिलावट सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा मामला है, इसलिए इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने महाराष्ट्र FDA के अभियान को जारी रखने की बात भी कही थी।
अब FSSAI CEO रजित पुन्हानी की तरफ से मिली सार्वजनिक प्रशंसा ने मुंढे के अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है।
हाई कोर्ट ने कुछ कार्रवाइयों पर उठाए थे सवाल
हालांकि महाराष्ट्र FDA के अभियान को केवल समर्थन ही नहीं मिला है। उसकी कुछ कार्रवाइयों पर न्यायिक स्तर पर सवाल भी उठे हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल में FDA की कुछ कार्रवाई को अनुपातहीन बताते हुए प्रक्रिया और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए थे। अदालत ने संकेत दिया था कि नियमों को लागू करते समय नियामक संस्था को व्यावहारिकता और उचित प्रक्रिया का भी ध्यान रखना चाहिए।
इससे खाद्य सुरक्षा के मामले में एक महत्वपूर्ण बहस भी सामने आई है—नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है, लेकिन प्रवर्तन करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
खाद्य सुरक्षा पर बढ़ी राष्ट्रीय चर्चा
तुकाराम मुंढे की कार्रवाई और अब FSSAI CEO की प्रतिक्रिया के बाद खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है। आम तौर पर रेस्टोरेंट या दुकान में खाना खरीदते समय ग्राहक यह मानकर चलता है कि उसे मिलने वाला खाद्य पदार्थ सुरक्षित है। इसकी निगरानी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी नियामक संस्थाओं की होती है।
खराब स्वच्छता, मिलावट, गलत तरीके से खाद्य पदार्थों का भंडारण और मानकों का उल्लंघन सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसलिए नियमित निरीक्षण और नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण माना जाता है।
FSSAI CEO का हर राज्य में समर्पित फूड सेफ्टी कमिश्नर की जरूरत पर जोर देना इसी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण टिप्पणी मानी जा रही है।
मुंढे की कार्रवाई बनी उदाहरण
रजित पुन्हानी की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा है। उन्होंने महाराष्ट्र के उदाहरण के जरिए बताया कि कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए बिना भी प्रशासनिक इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन से प्रवर्तन को मजबूत किया जा सकता है।
यही कारण है कि उन्होंने तुकाराम मुंढे की कार्यशैली को **'अगर चाह है तो रास्ता निकल ही जाता है'** की मिसाल के तौर पर पेश किया।
फिलहाल महाराष्ट्र FDA का अभियान जारी है। आने वाले समय में यह भी देखा जाएगा कि खाद्य सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र में अपनाए जा रहे मॉडल से दूसरे राज्य क्या सीख लेते हैं और क्या FSSAI प्रमुख की राय के अनुरूप राज्यों में समर्पित फूड सेफ्टी कमिश्नर की व्यवस्था को और मजबूत किया जाता है।
एक बात साफ है कि तुकाराम मुंढे की कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा विभाग को प्रशासनिक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वहीं FSSAI के शीर्ष अधिकारी से मिली प्रशंसा ने इस बहस को और व्यापक कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासन के जरिए खाद्य सुरक्षा कानूनों को कितनी मजबूती से लागू किया जा सकता है।
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