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Mumbai : गरीब रथ में महिला की मौत, मेडिकल मदद को लेकर विवाद

Maharashtra महाराष्ट्र: बांद्रा टर्मिनस से दिल्ली सराय रोहिल्ला जा रही गरीब रथ एक्सप्रेस में एक महिला यात्री की मौत का मामला सामने आया है। घटना 12 जुलाई की बताई जा रही है, जब ट्रेन संख्या 12216 में सफर के दौरान महिला यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों और सहयात्रियों ने आरोप लगाया है कि गंभीर हालत के बावजूद ट्रेन को तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए नहीं रोका गया।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई यात्रियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आपात स्थिति में रेलवे की ओर से तय मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।
जानकारी के अनुसार, महिला यात्री ट्रेन में सफर कर रही थीं, तभी उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। सहयात्रियों और महिला के बेटे का दावा है कि उन्होंने ट्रेन को रोककर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, लेकिन उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया।
परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते मेडिकल सहायता मिल जाती तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना को लेकर यात्रियों ने रेलवे की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, पश्चिम रेलवे (WR) ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यात्री को यात्रा के दौरान हुई मेडिकल इमरजेंसी के लिए उन्हें दुख है। रेलवे ने बताया कि घटना के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की गई थी।
पश्चिम रेलवे के अनुसार, 12 जुलाई को शाम 4 बजकर 22 मिनट पर वडोदरा (BRC) के एक डॉक्टर से ट्रेन में मौजूद कर्मचारियों को चिकित्सा सहायता के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ था। इसके बाद तुरंत संबंधित स्टेशन अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।
रेलवे ने बताया कि इसके बाद शाम 4 बजकर 32 मिनट पर 108 एंबुलेंस के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ। मामले को तुरंत संबंधित नियंत्रण अधिकारियों के साथ समन्वय कर आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन में किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने की स्थिति में कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नजदीकी स्टेशन पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। इस मामले में भी संबंधित अधिकारियों को सूचित किया गया था।
हालांकि, महिला यात्री के परिवार और सहयात्रियों के आरोपों के बाद घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और ऐसे मामलों में तेज निर्णय लेने की जरूरत होती है।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने रेलवे से मामले की विस्तृत जांच करने और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि ट्रेन को क्यों नहीं रोका गया। लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
रेलवे की ओर से अभी तक घटना को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, पश्चिम रेलवे ने मेडिकल सहायता से जुड़े रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अपनी ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी दी है।
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों को परेशानी होने पर हेल्पलाइन और ऑनबोर्ड स्टाफ के जरिए सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होती है।
फिलहाल इस मामले में यात्रियों के आरोप और रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के बीच अंतर नजर आ रहा है। अब यह देखना होगा कि रेलवे या संबंधित विभाग इस घटना की विस्तृत जांच करता है या नहीं।
महिला यात्री की मौत ने एक बार फिर रेल यात्रा के दौरान मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। यात्रियों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।





