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Mumbai : बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स की हाउसिंग सोसाइटी में पानी संकट

Maharashtra महाराष्ट्र: बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित कनकिया पेरिस सीएचएस में रहने वाले लोगों ने नल के पानी की कथित मिलावट को लेकर गंभीर चिंता पहुंचाई है। बॉस का दावा है कि पिछले 14 महीनों से वे पीने के पानी के लिए पूरी तरह बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं।
सोसाइटी में कुल 464 फ्लैट हैं और कई परिवारों का कहना है कि उन्हें हर महीने केवल पीने के पानी पर ₹4,000 से ₹9,000 तक खर्च करना पड़ रहा है। निवासियों के अनुसार, यह स्थिति लंबे समय से जारी है और अब यह एक गंभीर आर्थिक बोझ बन चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कर्मचारियों ने मैनेजमेंट कमिटी (एमसी), बृहन्मुंबई नगर निगम और पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वे इस समस्या के समाधान में पर्याप्त कदम नहीं उठाएंगे।
निवासी पुनीत चौधरी ने आरोप लगाया कि सोसाइटी की पानी सप्लाई लाइन में सीवेज का पानी मिल जाता है, जिससे पानी पीने योग्य नहीं रहता। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का संकेत है।
दूषित पानी का सेवन गंभीर पेट संबंधी बीमारियों और संक्रमण का कारण बन सकता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक खतरा रहता है।
निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका यह भी कहना है कि मैनेजिंग कमिटी पर लैब रिपोर्ट और जांच से जुड़ी जानकारी छिपाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सोसाइटी के लोगों ने इस मुद्दे को एक संभावित पब्लिक हेल्थ संकट बताया है और तत्काल समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
मुंबई में पहले भी कई हाउसिंग सोसाइटी में पानी और सीवेज मिलावट की फिटिंग सामने आ रही हैं, लेकिन इस मामले ने लंबी अवधि की वजह से खास ध्यान खींचा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पानी सप्लाई की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, स्थायी समाधान के लिए नई पाइपलाइन और शुद्धिकरण व्यवस्था लागू करने की अपील भी की गई है।
कुल मिलाकर, यह मामला शहरी हाउसिंग सोसाइटियों में जल आपूर्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।





