महाराष्ट्र

Mumbai : दहेज उत्पीड़न के मामलों में हल्की बढ़ोतरी, 2026 में 124 शिकायतें दर्ज

Kavita2
18 May 2026 11:40 AM IST
Mumbai : दहेज उत्पीड़न के मामलों में हल्की बढ़ोतरी, 2026 में 124 शिकायतें दर्ज
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Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई में वर्ष 2026 के दौरान दहेज से जुड़ी परेशानियों के मामलों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंबई पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक दहेज मांग से संबंधित शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के कुल 124 मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या वर्ष 2025 की इसी अवधि में दर्ज 120 मामलों की तुलना में थोड़ी अधिक है, जिससे संकेत मिलता है कि इस सामाजिक समस्या में स्थिरता के साथ मामूली वृद्धि बनी हुई है।

पुलिस डेटा के अनुसार, दहेज से जुड़े मामलों में गंभीर परिणाम भी सामने आए हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत इस वर्ष दहेज से संबंधित एक मौत की रिपोर्ट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के बराबर ही है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस गंभीर अपराध में कमी नहीं आई है।

इसके अलावा, दहेज उत्पीड़न से जुड़ी घटनाओं में आत्महत्याओं के मामले भी सामने आए हैं। 2026 में अब तक दहेज से जुड़ी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के कारण दो महिलाओं की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके मुकाबले वर्ष 2025 में ऐसे पांच मामले सामने आए थे। हालांकि इस वर्ष संख्या में गिरावट देखी गई है, लेकिन यह समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है।

पुलिस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि केवल दहेज ही नहीं, बल्कि वैवाहिक घरों में अन्य कारणों से होने वाले मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। मार्च 2026 तक ऐसे कुल 110 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 134 थी, जो इस वर्ष कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज और वैवाहिक उत्पीड़न के मामलों में दर्ज आंकड़े केवल रिपोर्ट किए गए मामलों को दर्शाते हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित महिलाएं सामाजिक दबाव और पारिवारिक कारणों से शिकायत दर्ज नहीं करा पाती हैं।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, समाज में जागरूकता बढ़ने के बावजूद दहेज प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है। कई मामलों में यह समस्या मानसिक और आर्थिक दबाव के रूप में सामने आती है, जो धीरे-धीरे गंभीर उत्पीड़न का रूप ले लेती है। इसके परिणामस्वरूप कई बार स्थिति आत्महत्या या गंभीर हिंसा तक पहुंच जाती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है और पीड़ितों को सुरक्षा एवं कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, जागरूकता अभियानों और महिला सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस समस्या के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, मुंबई में दहेज से जुड़े मामलों में हल्की बढ़ोतरी और वैवाहिक उत्पीड़न की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सामाजिक स्तर पर इस समस्या के समाधान के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

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