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मुंबई पुलिस पेरोल घोटाला: 10 फर्जी कर्मचारियों के नाम पर निकाले ₹6.41 करोड़

Kavita2
13 Aug 2026 9:58 AM IST
मुंबई पुलिस पेरोल घोटाला: 10 फर्जी कर्मचारियों के नाम पर निकाले ₹6.41 करोड़
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मुंबई। मुंबई पुलिस के सैलरी सिस्टम में कथित तौर पर हुए बड़े वित्तीय घोटाले ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि पुलिस विभाग के वेतन सिस्टम में 10 ऐसे फर्जी कर्मचारियों के नाम दर्ज किए गए, जो वास्तव में पुलिस बल का हिस्सा ही नहीं थे। इन फर्जी नामों के जरिए करीब 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी निकाली गई और यह रकम कथित तौर पर संबंधित बैंक खातों में जमा की गई।

मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने 11 अगस्त को नॉर्थ रीजनल डिवीजन के पूर्व एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर रामकिशन गोस्वामी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में यह पहली गिरफ्तारी बताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में कितने लोग शामिल थे और फर्जी वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित की गई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन तैयार किया गया और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की राशि निकाली गई। आरोप है कि इन फर्जी कर्मचारियों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए। पुलिस अब बैंक लेनदेन, वेतन रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों की जांच कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में शामिल आरोपियों में से एक ने वर्ष 2020-21 में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। बताया जा रहा है कि इस्तीफे के पत्र में उसने लिखा था कि उसे अब नौकरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि जिस महिला से उसने शादी की है, वह एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती है।

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोपी की पत्नी मूल रूप से पंजाब की रहने वाली है और वर्तमान में कनाडा में रह रही है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले का एक मुख्य आरोपी विदेश में छिपा हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और पुलिस सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

मुंबई पुलिस विभाग के मिनिस्ट्रियल स्टाफ के बीच चर्चा है कि कथित आरोपी को घोटाले के उजागर होने की भनक लग गई थी, जिसके बाद उसने नौकरी छोड़ दी। हालांकि, पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है और इस्तीफे के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी कर्मचारियों के नाम किस स्तर पर बनाए गए, वेतन मंजूरी की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका थी और इतनी बड़ी रकम बिना जांच के कैसे जारी हो गई। पुलिस विभाग के रिकॉर्ड और डिजिटल सिस्टम की भी जांच की जा रही है।

इस मामले ने पुलिस विभाग के आंतरिक वित्तीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी विभागों में कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी प्रक्रिया में कई स्तरों पर सत्यापन होता है, ऐसे में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घोटाले का दायरा कितना बड़ा है और इसमें कितने लोगों की संलिप्तता थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या फर्जी कर्मचारियों के नाम लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे थे या यह हाल के वर्षों में किया गया फर्जीवाड़ा है।

मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। बैंक खातों की जानकारी, वेतन रिकॉर्ड, विभागीय फाइलों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां कर सकती है।

फिलहाल मुंबई पुलिस पेरोल घोटाला जांच के केंद्र में है। करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग के इस मामले में आने वाले दिनों में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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