महाराष्ट्र

‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजा मुंबई, 1.99 लाख से ज्यादा मूर्तियों का विसर्जन

Kavita2
27 Sept 2026 10:50 AM IST
‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजा मुंबई, 1.99 लाख से ज्यादा मूर्तियों का विसर्जन
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मुंबई। ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के बीच मुंबई ने शुक्रवार को अपने आराध्य भगवान गणेश को भावुक विदाई दी। दस दिनों तक चले गणेशोत्सव के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर शहर के अलग-अलग हिस्सों में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए विशाल जुलूस निकाले गए। ढोल-ताशों की गूंज और बप्पा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने अंतिम पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश को विदा किया।

दस दिनों तक चले गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में कुल 1,99,213 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में एक प्रतिशत से अधिक बताया गया है। घरों और सार्वजनिक गणेश मंडलों में स्थापित प्रतिमाओं को अलग-अलग दिनों में विसर्जित किया गया, जबकि अनंत चतुर्दशी पर बड़े सार्वजनिक मंडलों की प्रतिमाओं की विदाई के साथ उत्सव का समापन हुआ।

शुक्रवार सुबह से ही मुंबई की सड़कों पर गणेश भक्तों की भीड़ दिखाई देने लगी थी। श्रद्धालुओं ने बप्पा के सामने अंतिम प्रार्थना की और दस दिनों तक अपने बीच रहने के लिए उनका आभार जताया। इसके साथ ही अगले वर्ष फिर उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान गणेश का स्वागत करने की कामना की गई।

अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन जुलूस सुबह-सुबह शुरू हो गए। लालबाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के प्रसिद्ध ‘मुंबाचा राजा’ की विसर्जन यात्रा सुबह करीब सात बजे शुरू हुई। प्रतिमा के मंडप से बाहर निकलते ही बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे लगाए।

इसके बाद दिन चढ़ने के साथ लालबाग, परेल, गिरगांव और मुंबई के विभिन्न उपनगरों से दूसरे प्रमुख गणेश मंडलों की प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस भी निकलने लगे। जगह-जगह श्रद्धालु भगवान गणेश की एक झलक पाने और विदाई देने के लिए सड़कों के किनारे खड़े दिखाई दिए।

गणेशोत्सव के अंतिम दिन मुंबई का माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहा। कहीं ढोल-ताशों की धुन पर श्रद्धालु नाचते नजर आए तो कहीं परिवार के सदस्य शांत भाव से अपने घर के गणपति को विदा करते दिखाई दिए। फूलों से सजी गणेश प्रतिमाओं के साथ निकले जुलूसों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

विसर्जन से पहले भक्तों ने गणेश प्रतिमाओं की आरती की। कई जगह भगवान गणेश को मोदक और अन्य प्रसाद अर्पित किए गए। इसके बाद भक्तों ने हाथ जोड़कर बप्पा से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की और अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हुए प्रतिमाओं को विसर्जन स्थलों की ओर रवाना किया।

मुंबई में गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। दस दिनों तक शहर के अलग-अलग इलाकों में बने गणेश पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सार्वजनिक मंडलों ने आकर्षक सजावट और गणेश प्रतिमाओं के जरिए लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया।

अनंत चतुर्दशी के दिन बड़े गणेश मंडलों की विसर्जन यात्रा देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लालबाग और परेल जैसे इलाकों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। प्रमुख गणेश प्रतिमाओं के जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए विसर्जन स्थलों की ओर बढ़े।

गिरगांव चौपाटी मुंबई के प्रमुख विसर्जन स्थलों में शामिल है। बड़े सार्वजनिक मंडलों की कई प्रतिमाओं का यहां विसर्जन किया जाता है। अंतिम दिन बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के पहुंचने के कारण यहां विशेष व्यवस्था की गई। समुद्र किनारे भक्त अपने बप्पा की अंतिम झलक पाने के लिए मौजूद रहे।

शहर में प्राकृतिक जल स्रोतों के साथ कृत्रिम तालाबों में भी प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की गई। छोटी और घरेलू प्रतिमाओं के लिए कृत्रिम विसर्जन स्थलों का इस्तेमाल किया गया। इससे श्रद्धालुओं को अपने आसपास ही प्रतिमा विसर्जन की सुविधा मिली।

दस दिनों के उत्सव के दौरान 1.99 लाख से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन अपने आप में गणेशोत्सव के प्रति मुंबई के उत्साह को दिखाता है। पिछले साल के मुकाबले इसमें एक प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसमें सार्वजनिक मंडलों के साथ बड़ी संख्या में घरेलू गणेश प्रतिमाएं भी शामिल रहीं।

गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ उत्सव दस दिनों तक अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ चलता रहा। घरों में परिवारों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की, जबकि सार्वजनिक मंडलों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। कई श्रद्धालुओं ने एक दिन, डेढ़ दिन, पांच दिन और सात दिन के बाद अपने गणपति का विसर्जन किया, जबकि कई बड़ी प्रतिमाओं को अनंत चतुर्दशी पर विदाई दी गई।

अंतिम दिन विसर्जन के दौरान भक्तों में उत्साह के साथ भावुकता भी दिखाई दी। दस दिनों तक घर और पंडाल में विराजमान भगवान गणेश को विदा करते समय कई श्रद्धालु भावुक नजर आए। लोगों ने भगवान गणेश से अगले वर्ष जल्दी आने की प्रार्थना की।

मुंबई के अलग-अलग इलाकों से निकलने वाले जुलूसों के कारण शहर में शुक्रवार को गणेशोत्सव की अलग ही तस्वीर दिखाई दी। सड़कों पर रंग-बिरंगे फूल, ढोल-ताशे और बप्पा के जयकारे सुनाई देते रहे। गणेश मंडलों के स्वयंसेवक भी जुलूसों के साथ व्यवस्था संभालते दिखाई दिए।

देर रात तक अलग-अलग विसर्जन स्थलों पर प्रतिमाओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बड़ी प्रतिमाओं को विसर्जित करने में समय लगने के कारण कई जुलूस लंबी अवधि तक चलते रहे। भक्त भी अपने आराध्य को अंतिम विदाई देने तक जुलूसों के साथ बने रहे।

गणेशोत्सव के समापन के साथ मुंबई में दस दिनों से जारी उत्सव की रौनक भी समाप्त हुई। हालांकि बप्पा को विदा करते हुए श्रद्धालुओं के बीच अगले वर्ष के गणेशोत्सव को लेकर उत्साह साफ नजर आया। अंतिम प्रार्थना के साथ भक्तों ने भगवान गणेश का धन्यवाद किया और फिर से उनके आगमन की कामना की।

‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ भगवान गणेश को विदाई दी गई। दस दिनों की पूजा, उत्सव और भक्ति के बाद मुंबई ने एक बार फिर अपनी पुरानी परंपरा के अनुरूप भावुक माहौल में गणेशोत्सव का समापन किया।

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