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मुंबई क्राइम ब्रांच ने गोवा से पकड़ा बड़ा साइबर ठगी रैकेट, दुबई कनेक्शन की जांच तेज

मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच ने साइबर धोखाधड़ी और अवैध ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पाइधोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज साइबर फ्रॉड के एक मामले की जांच के दौरान सामने आए इस रैकेट के तार मुंबई से लेकर गोवा और विदेशों तक जुड़े होने का संदेह है। क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 ने गोवा के एक लग्जरी विला पर छापा मारकर 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद की जांच में गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क के आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है।
गोवा के लग्जरी विला से चल रहा था ऑपरेशन
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लोगों का एक समूह गोवा में किराए के लग्जरी विला से अपना काम संचालित कर रहा था। इसके बाद क्राइम ब्रांच यूनिट-2 की टीम ने गोवा पहुंचकर कार्रवाई की। 4 अगस्त को की गई छापेमारी में पुलिस ने कथित तौर पर आरोपियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों के साथ पकड़ा।
छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, चेकबुक और बैंक पासबुक बरामद किए गए। एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 128 एटीएम कार्ड, 76 सिम कार्ड, 22 चेकबुक और 77 पासबुक समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।
म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि कथित रैकेट में ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ का इस्तेमाल किया जाता था। ऐसे बैंक खाते दूसरे लोगों के नाम पर खोले या हासिल किए जाते हैं और बाद में साइबर ठगी से हासिल रकम को घुमाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
पुलिस को संदेह है कि नेटवर्क से जुड़े लोग मुंबई में ऐसे बैंक खाते खुलवाते थे और उनसे संबंधित एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक तथा सिम कार्ड हासिल कर लेते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल गोवा में बैठे ऑपरेटरों द्वारा पैसों के लेनदेन के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने बैंक खाते इस्तेमाल हुए और इनसे कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
500 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच
पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की आशंका है। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 150 म्यूल बैंक खातों की जांच की जा रही है। इन खातों में जमा रकम और उनके जरिए किए गए ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस ने कुछ खातों में मौजूद बड़ी रकम को फ्रीज भी किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान अलग-अलग बैंक खातों में करीब 50 से 100 करोड़ रुपये तक की रकम फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी रकम साइबर अपराध से जुड़ी थी।
83 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा नेटवर्क
जांच का दायरा इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के शुरुआती विश्लेषण में देशभर में दर्ज कम से कम 83 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से संभावित संबंध सामने आए हैं। इन शिकायतों की जानकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के जरिए पुलिस तक पहुंची थी।
अब क्राइम ब्रांच बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों, लाभार्थियों और विदेश में बैठे संचालकों तक पहुंचना है।
दुबई कनेक्शन की भी जांच
पुलिस को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क के तार दुबई में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, म्यूल खातों में पहुंचने वाली रकम को तेजी से दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता था और आखिरकार इसे विदेश में बैठे संचालकों तक पहुंचाने की व्यवस्था थी।
हालांकि, उपलब्ध पुलिस जांच में अलग-अलग रिपोर्टों में नेटवर्क के विदेशी हैंडलर को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। इसलिए इस स्तर पर किसी एक व्यक्ति को मास्टरमाइंड बताना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। पुलिस फिलहाल विदेश में बैठे संदिग्ध संचालकों की पहचान और उनकी भूमिका की पुष्टि करने में जुटी है।
आरोपी कमीशन पर करते थे काम
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित नेटवर्क में शामिल लोगों को बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करने के बदले वेतन और कमीशन दिया जाता था। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों को मासिक भुगतान के साथ ट्रांजेक्शन पर करीब तीन प्रतिशत तक कमीशन मिलने की बात सामने आई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों की भर्ती कैसे की गई और उन्हें साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों के लिए किस तरह प्रशिक्षित किया गया।
ऑनलाइन गेमिंग से भी जुड़े तार
पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क केवल साइबर फ्रॉड तक सीमित नहीं था। कथित तौर पर ऑनलाइन गेमिंग और अवैध वित्तीय लेनदेन के लिए भी बैंक खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। जांचकर्ताओं ने कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और चैनलों के इस्तेमाल की जानकारी भी जुटाई है।
इससे पुलिस को आशंका है कि रैकेट का नेटवर्क पहले अनुमान से कहीं बड़ा हो सकता है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गोवा के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह के ऑपरेशन चल रहे हैं या नहीं।
जांच अभी जारी
मुंबई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद साइबर ठगी के इस नेटवर्क की परतें लगातार खुल रही हैं। बड़ी संख्या में बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों और सिम कार्ड की बरामदगी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस अब पैसों के पूरे ट्रेल को ट्रैक करने के साथ-साथ विदेश में बैठे संदिग्ध संचालकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया है और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूतों और बैंकिंग रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही पूरे रैकेट की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल गोवा के लग्जरी विला से सामने आया यह नेटवर्क मुंबई क्राइम ब्रांच के लिए साइबर अपराध और मनी ट्रेल से जुड़ी एक बड़ी जांच बन चुका है।





