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Mumbai ऑटो ड्राइवरों पर संकट: परमिट रिन्यूअल के लिए मराठी टेस्ट अनिवार्य

Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई में ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का टेस्ट अनिवार्य किए जाने को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। पिछले ग्यारह सालों से मुंबई में ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले रमेश बिंद जैसे कई ड्राइवरों के लिए यह नियम उनकी आजीविका पर असर डाल सकता है। महाराष्ट्र सरकार ने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े एक RTO नियम को फिर से लागू करने की मुहिम शुरू की है, जिसके तहत सभी ऑटो और टैक्सी चालकों को वैध परमिट बनाए रखने के लिए मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना जरूरी होगा।
फिलहाल मीरा-भायंदर क्षेत्र में इस नियम को लेकर एक पायलट वेरिफिकेशन अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें 12,000 से अधिक ड्राइवरों की जांच की जा रही है। इस दौरान RTO अधिकारी परमिट और डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जांच के साथ-साथ मौके पर ही मराठी भाषा का टेस्ट भी ले रहे हैं। जो चालक इस टेस्ट में असफल हो जाते हैं या जिनके दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई जाती है, उनके लाइसेंस और परमिट सस्पेंड या रद्द किए जाने की संभावना है।
रमेश बिंद ने बताया कि वे पिछले एक दशक से अधिक समय से मुंबई की सड़कों पर वाहन चला रहे हैं और हर रास्ते से परिचित हैं, लेकिन उन्होंने औपचारिक रूप से मराठी पढ़ना या लिखना नहीं सीखा है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा बिहार में अपने परिवार को भेजने में खर्च होता है, और अगर उनका परमिट रद्द हुआ तो उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
इसी तरह अन्य राज्यों से आए कई ड्राइवर भी इस नियम को लेकर चिंतित हैं। अंधेरी में काम करने वाले सुरेश कुमार, जो कर्नाटक से आए हैं, ने कहा कि उनके बच्चे मुंबई में ही पैदा हुए हैं और यह शहर उनका घर बन चुका है, लेकिन अगर परमिट रद्द हुआ तो वे पूरी तरह बेरोजगार हो जाएंगे। उत्तर प्रदेश के ड्राइवर मोहम्मद सलीम ने भी कहा कि वे मराठी सीखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके लिए समय दिया जाना चाहिए, क्योंकि अचानक नियम लागू करने से हजारों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने स्पष्ट किया है कि RTO नियमों के तहत मराठी भाषा का ज्ञान पहले से ही आवश्यक है और पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियम का उद्देश्य यात्री और चालक के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करना है।
वहीं टैक्सी मेन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शशांक राव ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक बार परमिट जारी होने के बाद दोबारा वेरिफिकेशन की जरूरत क्यों है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश ड्राइवर पहले से ही यात्रियों से बातचीत के लिए पर्याप्त मराठी जानते हैं और अचानक सख्ती से लागू किए जाने से असंतोष बढ़ सकता है।
इस पूरे मुद्दे ने मुंबई के परिवहन क्षेत्र में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर प्रशासन नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों ड्राइवर अपनी आजीविका को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।





