महाराष्ट्र

म्यूल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़

Kavita2
4 Oct 2026 10:03 AM IST
म्यूल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़
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रायगढ़। साइबर धोखाधड़ी से जुड़े पैसों को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कथित ‘म्यूल’ बैंक अकाउंट और सिम कार्ड नेटवर्क के खिलाफ रायगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर पुलिस स्टेशन की जांच के दौरान पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक 16 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है। आरोप है कि ये लोग बैंक खातों और सिम कार्ड की व्यवस्था कर उन्हें साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाते थे। इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग साइबर अपराधों से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने में किया जाता था।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में बैंकिंग और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं। आरोपियों के पास से 57 हजार रुपये नकद, 72 एटीएम कार्ड, 52 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन और तीन लैपटॉप समेत अन्य सामान बरामद किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड और सिम कार्ड मिलने के बाद पुलिस इस नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और इससे जुड़े बैंक खातों की जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी एक संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा थे। इस नेटवर्क के तहत अलग-अलग लोगों के नाम से बैंक खाते खोले जाते थे। बाद में इन बैंक खातों को कमीशन के बदले साइबर अपराध से जुड़े दूसरे लोगों को उपलब्ध करा दिया जाता था। इन्हीं खातों में ठगी का पैसा मंगाया जाता और फिर अलग-अलग माध्यमों से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया जाता था।

साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे बैंक खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। अपराधी सीधे अपने बैंक खातों में ठगी की रकम लेने के बजाय दूसरे लोगों के नाम पर मौजूद खातों का इस्तेमाल करते हैं। इससे रकम के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो जाता है।

रायगढ़ पुलिस की जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े खातों का इस्तेमाल कई तरह की साइबर धोखाधड़ी में किया जा रहा था। इनमें फर्जी निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर रकम जमा कराना, पार्ट-टाइम नौकरी का ऑफर देकर पैसे ऐंठना, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर रकम ट्रांसफर कराना और शेयर बाजार में निवेश से मोटे मुनाफे का झांसा देकर ठगी करना शामिल है।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी के बाद पीड़ितों से हासिल रकम को म्यूल खातों में भेजा जाता था। इसके बाद रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने या एटीएम के जरिए निकालने जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती थी। कई खातों के बीच लगातार पैसे ट्रांसफर करने से रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी की पहचान मुश्किल बनाने की कोशिश की जाती थी।

जांच के दौरान 72 एटीएम कार्ड बरामद होना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग माना जा रहा है। पुलिस अब इन कार्डों से जुड़े बैंक खातों का विवरण खंगाल सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित खातों में कितनी रकम का लेन-देन हुआ और देश के किन-किन हिस्सों से साइबर ठगी की रकम इन खातों में पहुंची थी।

इसी तरह जब्त किए गए 52 सिम कार्ड की भी तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होगी। साइबर अपराध में फर्जी या दूसरे लोगों के दस्तावेजों पर लिए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल संपर्क स्थापित करने, बैंकिंग ओटीपी हासिल करने और विभिन्न ऑनलाइन खातों को संचालित करने में किया जा सकता है। पुलिस इन सिम कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबरों और उनकी गतिविधियों की जांच कर नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

18 मोबाइल फोन और तीन लैपटॉप से मिलने वाला डिजिटल डेटा भी जांच की दिशा तय कर सकता है। उपकरणों में मौजूद चैट, बैंकिंग एप्लिकेशन, लेन-देन का रिकॉर्ड, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल जानकारियों को खंगाला जा सकता है। इससे नेटवर्क के संचालकों और दूसरे सहयोगियों की पहचान सामने आने की संभावना है।

पुलिस की जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि जिन लोगों के नाम से बैंक खाते खोले गए थे, उनमें कितने लोग पूरे नेटवर्क की जानकारी रखते थे। कई मामलों में साइबर अपराधी लोगों को कमीशन का लालच देकर उनका बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित जानकारी हासिल कर लेते हैं। बाद में इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल ठगी की रकम को घुमाने के लिए किया जाता है।

मामले में 16 वर्षीय नाबालिग की कथित संलिप्तता ने भी पुलिस का ध्यान खींचा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि नाबालिग इस नेटवर्क के संपर्क में कैसे आया और उससे किस तरह का काम कराया जा रहा था। नाबालिग से संबंधित आगे की प्रक्रिया किशोर न्याय से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत की जाएगी।

पुलिस के सामने अब नेटवर्क के मुख्य संचालकों तक पहुंचने की चुनौती है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल उपकरणों की जांच के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि बैंक खाते और सिम कार्ड आखिर किसे सौंपे जाते थे। इसके साथ ही कमीशन की रकम और भुगतान के तरीके का भी पता लगाया जाएगा।

फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीम साइबर अपराधियों के सबसे आम तरीकों में से एक बन चुकी है। इसमें लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम पर कथित लाभ दिखाकर भरोसा जीता जाता है और बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद संपर्क बंद कर दिया जाता है।

इसी तरह पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड में घर बैठे कमाई का लालच देकर लोगों से अलग-अलग शुल्क या निवेश के नाम पर पैसे जमा कराए जाते हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में अपराधी खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को किसी मामले में फंसने का डर दिखाते हैं और रकम ट्रांसफर करवाते हैं। स्टॉक मार्केट फ्रॉड में अधिक रिटर्न और कथित विशेष ट्रेडिंग अवसरों के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जाता है।

ऐसे सभी मामलों में ठगी की रकम हासिल करने के लिए बैंक खातों की जरूरत होती है। यही वजह है कि म्यूल अकाउंट साइबर अपराध नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। यदि पुलिस ऐसे खातों की श्रृंखला को तोड़ने में सफल होती है तो साइबर अपराधियों तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है।

फिलहाल रायगढ़ साइबर पुलिस स्टेशन की कार्रवाई में छह लोगों को पकड़ा गया है और बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, सिम कार्ड तथा डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। पुलिस अब इनके जरिए हुए लेन-देन और साइबर ठगी के मामलों की कड़ियां जोड़ रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और बैंक खातों की जानकारी सामने आने की संभावना है।

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