- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- MP : अमृत 2.0 और...

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश में शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। अर्बन एडमिनिस्ट्रेशन और डेवलपमेंट कमिश्नर संकेत भोंडवे ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पलकमती नदी में किसी भी हालत में बिना ट्रीटमेंट के सीवेज का पानी न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि नदी में गिरने से पहले सभी अपशिष्ट जल का सही तरीके से ट्रीटमेंट किया जाना अनिवार्य है।
यह निर्देश उन्होंने शुक्रवार को अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत चल रहे निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश भी दिए।
भोंडवे ने कहा कि शहरी विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता और पर्यावरण सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, खासकर उन परियोजनाओं में जो सीधे जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी हैं।
निरीक्षण के दौरान सोहागपुर नगर परिषद के अंतर्गत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने उन्हें परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और आगे की योजना के बारे में जानकारी दी। कमिश्नर ने काम की प्रगति पर संतोष जताते हुए कुछ बिंदुओं पर सुधार के निर्देश भी दिए।
उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि विकास योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंच सके। साथ ही उन्होंने परियोजनाओं में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया।
पलकमती नदी में सीवेज गिरने की समस्या लंबे समय से पर्यावरण के लिए चिंता का विषय रही है। बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी नदी में जाने से जल प्रदूषण बढ़ता है, जिसका सीधा असर स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े सिस्टम को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में कच्चा सीवेज नदी में नहीं जाना चाहिए।
अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत राज्य में कई शहरी विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और स्वच्छता व्यवस्था में सुधार लाना है।
भोंडवे ने कहा कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर और स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण करें और कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी भी परियोजना में देरी या लापरवाही पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस निरीक्षण के बाद अधिकारियों में सक्रियता बढ़ गई है और संबंधित विभागों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी परियोजनाएं समय पर पूरी हों और जनता को उनका सीधा लाभ मिले।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए तो नदियों के प्रदूषण में काफी कमी लाई जा सकती है।
कुल मिलाकर, यह कदम राज्य में शहरी विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।





