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Maharashtra महाराष्ट्र। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए नितेश राणे ने ओवैसी के बयान को भड़काऊ करार दिया और कहा कि ऐसे बयानों से समाज में डर और विभाजन फैलाने की कोशिश की जाती है। नितेश राणे ने कहा, “भौंकने वाले कुत्ते काटते नहीं हैं। जब तक हमारा हिंदू राष्ट्र मजबूती से खड़ा है, तब तक इस तरह की धमकियों का कोई असर नहीं होने वाला। अगर कोई हिंदुओं को धमकाने की कोशिश करता है, हिंदू राष्ट्र को इस्लामिक राष्ट्र में बदलने की बात करता है या हमें डराने का प्रयास करता है, तो इसका मतलब है कि आगे चलकर हम अपने घरों में पूजा भी नहीं कर पाएंगे, ‘जय श्री राम’ भी नहीं बोल पाएंगे और महादेव के झंडे या बैनर भी नहीं लगा पाएंगे।”
मंत्री नितेश राणे ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता जानबूझकर ऐसे बयान देते हैं ताकि समाज में तनाव पैदा हो और राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग इस तरह की धमकियां देते हैं, उनके बारे में यह तय करने की जरूरत है कि क्या उन्हें महाराष्ट्र में रहने दिया जाना चाहिए या नहीं। “अब ऐसे लोगों को खुद सोचना चाहिए कि वे किस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं,” नितेश राणे ने कहा।
मंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र एक शांतिप्रिय राज्य है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग सद्भाव के साथ रहते हैं। लेकिन अगर कोई जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश करेगा, तो सरकार और समाज दोनों ही इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुओं की आस्था, परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। “हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने, पूजा करने और अपनी आस्था व्यक्त करने का अधिकार है। इसे चुनौती देने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाना चाहिए,” उन्होंने कहा।
नितेश राणे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जहां एक ओर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता इसे हिंदू समाज की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों और बदलते राजनीतिक माहौल के बीच इस तरह की टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं। फिलहाल, ओवैसी के बयान और उस पर नितेश राणे की प्रतिक्रिया ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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