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महाराष्ट्र में दूध 2 रुपये प्रति लीटर महंगा

Kavita2
9 Aug 2026 10:57 AM IST
महाराष्ट्र में दूध 2 रुपये प्रति लीटर महंगा
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मुंबई। महाराष्ट्र में दूध उपभोक्ताओं को मंगलवार, 11 अगस्त से अपनी जेब कुछ ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। राज्य की कई बड़ी सहकारी और निजी डेयरियों ने गाय और भैंस के दूध की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें 11 अगस्त से लागू होंगी। डेयरी क्षेत्र से जुड़े संगठनों के मुताबिक दूध खरीद, ईंधन और पैकेजिंग समेत विभिन्न लागतों में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में संशोधन का फैसला लिया गया है।

दूध की कीमत बढ़ने का सीधा असर राज्य के लाखों उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ने की संभावना है। महाराष्ट्र में दूध रोजमर्रा की जरूरत का प्रमुख खाद्य पदार्थ है और शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी खपत बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी भी नियमित दूध खरीदने वाले परिवारों के लिए मासिक खर्च बढ़ा सकती है।

डेयरी क्षेत्र की बैठक में लिया गया फैसला

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का निर्णय मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपालराव म्हास्के ने की। बैठक में डेयरी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने दूध उत्पादन और प्रोसेसिंग से जुड़ी बढ़ती लागत पर चर्चा की।

डेयरी संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से दूध कारोबार की लागत लगातार बढ़ रही है। दूध की खरीद कीमत के अलावा इसे प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाने, ठंडा रखने, पैक करने और बाजार तक भेजने में भी खर्च बढ़ा है। इन सभी लागतों का असर डेयरी कारोबार पर पड़ रहा है।

इसी वजह से एसोसिएशन की बैठक में दूध की खुदरा कीमतों में संशोधन का फैसला किया गया।

खरीद लागत बढ़ने का असर

डेयरी उद्योग के लिए दूध की खरीद सबसे महत्वपूर्ण खर्चों में से एक है। दूध उत्पादकों से दूध खरीदने के बाद डेयरियों को उसे संग्रहित करने, प्रोसेस करने और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है।

डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, दूध खरीद की लागत में बढ़ोतरी का सीधा असर प्रोसेसिंग कंपनियों पर पड़ता है। यदि अंतिम बिक्री मूल्य में बदलाव नहीं किया जाए तो बढ़ती लागत का भार डेयरी कंपनियों पर पड़ सकता है।

इसी कारण दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करने का फैसला किया गया है।

ईंधन की लागत भी बनी वजह

डेयरी क्षेत्र में परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूध को गांवों और संग्रह केंद्रों से डेयरी प्लांट तक पहुंचाने के बाद तैयार उत्पाद को अलग-अलग बाजारों में भेजना पड़ता है।

इसके लिए बड़ी संख्या में वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। ईंधन की लागत बढ़ने से परिवहन खर्च भी बढ़ता है। डेयरी संचालकों के अनुसार, यह बढ़ी हुई लागत भी दूध की अंतिम कीमत को प्रभावित करती है।

विशेष रूप से दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पाद के लिए समय पर परिवहन और कोल्ड चेन बनाए रखना जरूरी होता है। इसलिए ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत में वृद्धि का प्रभाव पूरे सप्लाई चेन पर पड़ता है।

पैकेजिंग खर्च भी बढ़ा

दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे पैकेजिंग लागत में वृद्धि को भी प्रमुख कारण बताया गया है। पैक्ड दूध को बाजार तक पहुंचाने के लिए प्लास्टिक पैकेजिंग और अन्य सामग्री की जरूरत होती है।

पैकेजिंग सामग्री की कीमत बढ़ने से डेयरियों की उत्पादन लागत में इजाफा होता है। इसके अलावा दूध की पैकिंग, स्टोरेज और वितरण के दौरान होने वाले अन्य खर्च भी कुल लागत को प्रभावित करते हैं।

डेयरी संचालकों का कहना है कि इन सभी खर्चों को देखते हुए दूध की कीमतों में मामूली वृद्धि करना जरूरी हो गया था।

गाय और भैंस दोनों के दूध पर असर

नई कीमतों का असर गाय और भैंस दोनों के दूध पर पड़ेगा। दोनों श्रेणियों के दूध की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की जाएगी।

इसका मतलब है कि 11 अगस्त से जिन उपभोक्ताओं को प्रतिदिन दूध खरीदना पड़ता है, उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई परिवार रोजाना 2 लीटर दूध खरीदता है तो उसे प्रतिदिन 4 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।

महीने के हिसाब से देखें तो नियमित दूध खरीदने वाले परिवारों का खर्च भी बढ़ जाएगा। हालांकि वास्तविक मासिक प्रभाव परिवार की दैनिक दूध खपत और स्थानीय डेयरी की कीमतों पर निर्भर करेगा।

उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा घरेलू खर्च

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आम परिवारों के मासिक बजट में खाद्य और घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा शामिल है। दूध का इस्तेमाल केवल सीधे पीने के लिए ही नहीं, बल्कि चाय, कॉफी, दही, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार करने में भी होता है।

इसलिए दूध की कीमत बढ़ने का अप्रत्यक्ष प्रभाव भी कई खाद्य उत्पादों पर पड़ सकता है। हालांकि 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी सीमित है, लेकिन नियमित रूप से दूध खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए इसका असर मासिक बजट में दिखाई दे सकता है।

डेयरी उद्योग के लिए लागत और कीमत के बीच संतुलन

डेयरी क्षेत्र में कीमत तय करना उत्पादकों, प्रोसेसर और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन का विषय है। दूध उत्पादकों को उचित खरीद मूल्य देना जरूरी है, वहीं डेयरियों को प्रोसेसिंग और वितरण लागत भी वहन करनी होती है।

दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमत सस्ती रखना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में लागत बढ़ने पर डेयरियों के सामने कीमत संशोधित करने का दबाव बनता है।

एसोसिएशन की बैठक में इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि का फैसला किया गया है।

11 अगस्त से लागू होंगी नई दरें

महाराष्ट्र में दूध की बढ़ी हुई कीमतें 11 अगस्त 2026 से लागू होंगी। सहकारी और निजी क्षेत्र की कई बड़ी डेयरियों द्वारा कीमत बढ़ाने के फैसले के बाद राज्य के दूध बाजार में नई दरें प्रभावी हो जाएंगी।

अब उपभोक्ताओं को दूध खरीदते समय प्रति लीटर 2 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा। डेयरी उद्योग का कहना है कि यह बढ़ोतरी बढ़ती खरीद, ईंधन और पैकेजिंग लागत के मद्देनजर की गई है।

फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में लागत में और बदलाव होता है या नहीं और उसका असर दूध की कीमतों पर पड़ता है या नहीं। 11 अगस्त से लागू होने वाली यह बढ़ोतरी महाराष्ट्र के दूध बाजार में नई कीमतों की शुरुआत करेगी।

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