महाराष्ट्र

दूध पर बढ़ा खर्च महाराष्ट्र में 11 अगस्त से नई कीमतें होंगी लागू

Ratna Netam
9 Aug 2026 5:47 PM IST
दूध पर बढ़ा खर्च महाराष्ट्र में 11 अगस्त से नई कीमतें होंगी लागू
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मुंबई : महाराष्ट्र के लोगों को महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। राज्य में 11 अगस्त से गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। दूध उत्पादक और प्रसंस्करण कल्याण संघ ने खुदरा कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करने का फैसला किया है। नई दरें लागू होने के बाद राज्यभर में उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी होगी। दूध रोजमर्रा की जरूरत की प्रमुख वस्तु होने के कारण इस फैसले का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है।
दूध की कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय में की जा रही है जब देशभर में डेयरी क्षेत्र में किसानों की लागत, दूध खरीद मूल्य और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर चर्चा जारी है। दूध उत्पादकों और प्रसंस्करणकर्ताओं का कहना है कि खरीद और संचालन से जुड़ी लागत में बढ़ोतरी के कारण खुदरा कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया है। उनके मुताबिक डेयरी क्षेत्र में किसानों से दूध खरीदने, उसे ठंडा रखने, परिवहन, प्रसंस्करण और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कीमतों में सीमित वृद्धि के जरिए पूरी डेयरी श्रृंखला के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
महाराष्ट्र में दूध की कीमत बढ़ने से घरों के साथ-साथ होटल, चाय-नाश्ते की दुकानों, मिठाई कारोबार और दूध से जुड़े अन्य छोटे कारोबारों पर भी इसका असर पड़ सकता है। जिन परिवारों में रोजाना अधिक मात्रा में दूध की खपत होती है, उनके मासिक खर्च में भी वृद्धि होगी। हालांकि प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी छोटी दिखाई दे सकती है, लेकिन नियमित और बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए महीने के अंत में इसका असर साफ नजर आ सकता है।
दूध की कीमतों में महाराष्ट्र में यह बदलाव केंद्र सरकार के हालिया स्पष्टीकरण के बाद सामने आया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार के मुताबिक मौजूदा बाजार परिस्थितियों के आधार पर दूध की कीमतें तय करने का काम सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा किया जाता रहेगा।
पिछले महीने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया था कि दूध की कीमतें बाजार आधारित प्रक्रिया के तहत तय होती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार दूध क्षेत्र के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था लागू करने पर विचार नहीं कर रही है। सरकार का कहना है कि डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करने, दूध की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने, उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा करने और पूरी डेयरी मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता निगरानी मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार की ओर से डेयरी क्षेत्र को संगठित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक देश में गांव स्तर पर 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की जा चुकी थीं। इसके अलावा 31,150 मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत किया गया है। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक दूध उत्पादकों को संगठित डेयरी क्षेत्र से जोड़ना है, ताकि किसानों को दूध की खरीद और बिक्री की बेहतर व्यवस्था मिल सके।
डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी सरकार ने कई आंकड़े सामने रखे हैं। सरकार के अनुसार देश में प्रतिदिन 168 लाख लीटर की दूध शीतलन क्षमता विकसित की जा चुकी है। इसके अलावा दूध की गुणवत्ता जांच के लिए देशभर में 76,748 उपकरण वितरित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन उपायों से दूध की गुणवत्ता की जांच बेहतर करने और डेयरी क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डेयरी क्षेत्र में प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमता बढ़ाने के लिए भी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार प्रतिदिन कुल 418 लाख लीटर की दूध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इसका उद्देश्य दूध को केवल कच्चे उत्पाद के तौर पर बेचने के बजाय उससे दही, पनीर, घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना है। इससे डेयरी कारोबार में रोजगार और किसानों के लिए बाजार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने पिछले एक दशक में देश के दूध उत्पादन में हुई वृद्धि को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत का दूध उत्पादन 2014-15 में 146 मिलियन मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 248 मिलियन मीट्रिक टन हो गया। इस अवधि में दूध उत्पादन में करीब 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत दुनिया के प्रमुख दूध उत्पादक देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आय डेयरी कारोबार पर निर्भर करती है।
महाराष्ट्र में 11 अगस्त से होने वाली 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी इसी व्यापक डेयरी अर्थव्यवस्था का हिस्सा मानी जा रही है। एक तरफ दूध उत्पादक और प्रसंस्करणकर्ता बढ़ती लागत के कारण कीमतों में संशोधन को जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के लिए लगातार बढ़ता घरेलू खर्च चिंता का विषय बना हुआ है। दूध, खाद्य पदार्थ और अन्य रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बदलाव का सीधा असर परिवारों के बजट पर पड़ता है।
फिलहाल महाराष्ट्र के उपभोक्ताओं के लिए अहम बात यह है कि 11 अगस्त से गाय और भैंस दोनों के दूध की खुदरा कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि लागू होगी। आने वाले दिनों में इस बढ़ोतरी का असर दूध से बने उत्पादों और छोटे खाद्य कारोबारों पर कितना पड़ता है, यह भी देखने वाली बात होगी। डेयरी क्षेत्र के लिए चुनौती यही है कि किसानों को उनकी लागत के अनुरूप बेहतर मूल्य मिले और साथ ही उपभोक्ताओं पर भी अत्यधिक बोझ न पड़े। दूध की कीमतों में यह नया बदलाव इसी संतुलन की चुनौती को एक बार फिर सामने लाता है।
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