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महाराष्ट्र
Gadchiroli के शहीद सैनिक गोपाल बचैया भीमनपल्लीवार जो गुमनामी में चले गए
Anurag
25 July 2025 7:14 PM IST

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Sironcha सिरोंचा:भारत के इतिहास में अनगिनत वीर सैनिकों ने मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। कुछ के नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गए, जबकि कुछ वीर योद्धाओं की गाथाएँ अनसुनी रह गईं। गढ़चिरौली: जिले के सिरोंचा गाँव के सपूत शहीद सैनिक गोपाल बचैया भीमनपल्लीवार, एक ऐसा ही वीर नाम है, जो आज भले ही भुला दिया गया हो, लेकिन अपने बलिदान के लिए अमर है।
गोपाल भीमनपल्लीवार का जन्म 1 जुलाई, 1934 को गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा नामक छोटे से गाँव में हुआ था। वे पद्मशाली समुदाय से थे। उनके परिवार में दो भाई - सोमैया और वेंकटेश, और एक बहन - अगम्मा थीं।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सिरोंचा के ज़िला परिषद प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने 1 अप्रैल 1941 को स्कूल में प्रवेश लिया और 3 जून 1948 को अपनी शिक्षा पूरी की। कम उम्र में ही उनमें देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा जागृत हो गई थी।
गोपाल भीमनपल्लीवार ने 22 जनवरी 1958 को प्रतिष्ठित भारतीय सेना इकाई, मद्रास इंजीनियर ग्रुप कोर ऑफ़ इंजीनियर्स में शामिल होकर अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की। यह इकाई फील्ड इंजीनियरिंग, पुल निर्माण और आयुध निपटान जैसे विभिन्न तकनीकी कार्यों के लिए प्रसिद्ध है।
सेवा में उनके अनुशासन, कौशल और समर्पण के कारण उन्हें कई ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गईं। उनके नेतृत्व में कई कठिन अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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