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Maratha आरक्षण आंदोलन में बड़ा मोड़: मनोज जारंगे ने अनिश्चितकालीन अनशन खत्म किया

Maharashtra महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार के सामने के साथ हुई बातचीत के बाद अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार की ओर से दिए गए 12-बिंदुओं वाले प्रस्ताव के बाद यह फैसला लिया गया, जिससे आंदोलन स्थल पर राहत और शांति का माहौल देखा गया।
जारेंगे ने यह अनशन शनिवार सुबह अंतरवाली सराय गांव में शुरू किया था। यह पिछले तीन दशकों में उनका नौवां अनशन था, जो मराठा आरक्षण के मुद्दे पर उनके लगातार संघर्ष को बरकरार है। इस बार भी बड़ी संख्या में समर्थक उनके साथ मौजूद रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में आंदोलन का माहौल बना रहा।
सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से आए प्रतिनिधियों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर जारंगे से विस्तृत बातचीत की। इस दौरान उन्हें 12-बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव सौंपा गया, जिसमें मराठा आरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और नीतिगत पहलुओं पर आगे की कार्यवाही का आश्वासन शामिल बताया जा रहा है। बातचीत के बाद देर रात के कुछ समय बाद जारंगे ने अनशन खत्म करने का निर्णय लिया।
अनशन समाप्त होने की खबर के बाद मौके पर मौजूद समर्थकों में राहत की भावना देखी गई। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन के कारण प्रशासन और स्थानीय लोगों पर भी लगातार दबाव बना हुआ था, लेकिन बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने से स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई है।
Maharashtra में मराठा आरक्षण का मुद्दा वर्षों से सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का केंद्र रहा है। मनोज जारंगे लगातार इस मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनशन और आंदोलन का सहारा लेते रहे हैं। उनका कहना रहा है कि मराठा समुदाय को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, और इसके लिए वे कई बार भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं।
इस बार भी अनशन के दौरान बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में जुटे रहे, जिससे प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए थे। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सरकार द्वारा दिया गया 12-पॉइंट प्रस्ताव इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव के विस्तृत क्रियान्वयन और कानूनी प्रक्रिया को लेकर आगे और चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक प्रारंभिक कदम है और अंतिम समाधान के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
अनशन खत्म करने के बाद जारंगे ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत का रास्ता अभी खुला है और आगे भी मांगों को लेकर चर्चा जारी रह सकती है।
पिछले तीन वर्षों में यह नौवां अनशन होने के कारण यह आंदोलन लगातार सुर्खियों में रहा है। हर बार की तरह इस बार भी सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की गई है, जिससे आगे के लिए उम्मीदें बनी हैं।
फिलहाल अनशन समाप्त होने के बाद स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन ने राहत की सांस ली है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में देखा जा रहा है।





