महाराष्ट्र

औरंगाबाद में NCP को बड़ा झटका, प्रतापसिंह पाटिल ने सतीश चव्हाण को 18,124 वोटों से हराया

Kavita2
29 Oct 2026 11:36 AM IST
औरंगाबाद में NCP को बड़ा झटका, प्रतापसिंह पाटिल ने सतीश चव्हाण को 18,124 वोटों से हराया
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मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में औरंगाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार प्रतापसिंह पाटिल की जीत के बाद मतदाताओं की नाराजगी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पाटिल ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मौजूदा विधान परिषद सदस्य सतीश चव्हाण को 18,124 मतों के अंतर से हराया। गुरुवार को अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए पाटिल ने कहा कि जब मतदाताओं को लगता है कि जनप्रतिनिधि उन्हें हल्के में ले रहे हैं, तो वे चुनाव में अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ मतदाताओं ने मतपेटी के भीतर पर्चियां छोड़कर भी अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की।

पाटिल के अनुसार, ऐसी ही एक पर्ची पर लिखा था, "सतीश (चव्हाण), भाई, अब हो गया।" उनका कहना था कि यह संदेश मतदाताओं के मन में मौजूद असंतोष को दर्शाता है। हालांकि, इन पर्चियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और यह विवरण पाटिल के बयान पर आधारित है।

औरंगाबाद स्नातक सीट पर सतीश चव्हाण को हार

महाराष्ट्र विधान परिषद की औरंगाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर हुए मुकाबले में प्रतापसिंह पाटिल ने मौजूदा एमएलसी सतीश चव्हाण को पराजित किया।

चुनाव में पाटिल की जीत का अंतर 18,124 वोट बताया गया है। यह मुकाबला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि एक ओर मौजूदा विधान परिषद सदस्य मैदान में थे, जबकि दूसरी ओर NCP (SP) के उम्मीदवार ने उन्हें चुनौती दी।

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद पाटिल ने मतदाताओं के फैसले को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मतदाता अपने प्रतिनिधियों के व्यवहार और कार्यशैली को गंभीरता से देखते हैं।

उनके अनुसार, जब लोगों को यह महसूस होने लगता है कि उनकी अपेक्षाओं और समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा, तो वे मतदान के जरिए जवाब दे सकते हैं।

मतपेटी में छोड़ी गई पर्चियों का किया जिक्र

प्रतापसिंह पाटिल ने चुनाव परिणाम के बाद एक दिलचस्प दावा भी किया। उन्होंने कहा कि नाराज मतदाताओं ने मतपेटी के भीतर संदेश लिखी पर्चियां छोड़ी थीं।

उनके मुताबिक, एक पर्ची पर सतीश चव्हाण को संबोधित करते हुए लिखा गया था, "सतीश, भाई, अब हो गया।"

पाटिल ने इस कथित संदेश को मतदाताओं की नाराजगी से जोड़कर देखा। उनका कहना था कि चुनाव में मतदाताओं ने अपने असंतोष को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी कितनी पर्चियां मिलीं और निर्वाचन अधिकारियों ने इनके संबंध में क्या जानकारी दी है।

मतपत्रों के साथ रखी गई किसी भी अतिरिक्त पर्ची का चुनावी परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह संबंधित चुनाव नियमों और निर्वाचन अधिकारियों के आकलन का विषय होता है।

36 घंटे से अधिक चली मतगणना

औरंगाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना लंबी चली। प्रथम वरीयता के मतों की गिनती में किसी भी उम्मीदवार ने जीत के लिए निर्धारित 88,558 मतों का कोटा हासिल नहीं किया। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गणना की गई।

अंतिम परिणाम में प्रतापसिंह पाटिल को 85,876 और सतीश चव्हाण को 67,752 वोट मिले। इस तरह पाटिल ने 18,124 मतों से जीत दर्ज की। गुरुवार तड़के चुनाव परिणाम घोषित किया गया।

केवल 12 से 15 दिन मिले प्रचार के लिए

जीत के बाद प्रतापसिंह पाटिल ने बताया कि उम्मीदवार घोषित होने के बाद उनके पास चुनाव प्रचार के लिए लगभग 12 से 15 दिन ही बचे थे।

उन्होंने दावा किया कि इस सीमित अवधि में उन्होंने 76 तालुकाओं का दौरा किया और मतदाताओं के सामने अगले छह वर्षों के लिए अपनी योजनाएं रखीं।

पाटिल ने स्नातक मतदाताओं और महाविकास आघाड़ी के नेताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा।

उनके अनुसार, मतदाताओं ने उनके काम करने के दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाओं पर भरोसा जताया।

महाविकास आघाड़ी में भी दिखा दिलचस्प मुकाबला

इस चुनाव की एक खास बात यह रही कि महाविकास आघाड़ी में शामिल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार दिलीप घुगे भी मैदान में थे।

इस संबंध में पूछे जाने पर प्रतापसिंह पाटिल ने इसे मित्रतापूर्ण मुकाबला बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं ने अंतिम समय तक इस स्थिति का समाधान निकालने की कोशिश की थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।

पाटिल के अनुसार, चुनाव प्रचार सामग्री में उद्धव ठाकरे की तस्वीर भी शामिल थी। उन्होंने दावा किया कि यदि गठबंधन समर्थक मतों का बंटवारा नहीं होता, तो उनकी जीत का अंतर और अधिक हो सकता था।

यह पाटिल का राजनीतिक आकलन है, जिसे चुनाव परिणाम से स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता।

निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी हासिल किए वोट

औरंगाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मुख्य मुकाबले के अलावा अन्य उम्मीदवारों को भी उल्लेखनीय संख्या में वोट मिले।

निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्र साबले पाटिल को 19,897 वोट मिले, जबकि शिवसेना (UBT) के दिलीप घुगे को 8,489 मत प्राप्त हुए।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मुकाबला केवल दो प्रमुख उम्मीदवारों तक सीमित नहीं था। अन्य प्रत्याशियों की मौजूदगी ने भी मतों के वितरण को प्रभावित किया।

वरीयता आधारित मतदान प्रणाली के कारण इस चुनाव में मतगणना और परिणाम निर्धारण की प्रक्रिया सामान्य प्रत्यक्ष चुनावों की तुलना में अधिक जटिल रही।

अब स्नातकों की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती

प्रतापसिंह पाटिल की जीत के बाद अब उनकी प्राथमिकताओं पर ध्यान रहेगा। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि से शिक्षित युवाओं, रोजगार की तलाश कर रहे उम्मीदवारों, शिक्षकों और अन्य मतदाताओं की अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान बेरोजगारी, शिक्षा और रोजगार से संबंधित मुद्दों को प्रमुखता दी गई थी। ऐसे में नए विधान परिषद सदस्य के सामने इन विषयों को सदन में उठाने और मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने की चुनौती होगी।

इस चुनाव का सबसे चर्चित पहलू पाटिल का वह बयान बन गया है, जिसमें उन्होंने मतदाताओं की नाराजगी और मतपेटी में छोड़ी गई कथित पर्चियों का जिक्र किया।

उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों को मतदाताओं की अपेक्षाओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, सतीश चव्हाण की हार के पीछे कौन-कौन से कारण निर्णायक रहे, इसका व्यापक आकलन चुनावी आंकड़ों और मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही किया जा सकता है।

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