महाराष्ट्र

BMW हिट एंड रन केस में मिहिर शाह को बड़ा झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

Kavita2
8 Nov 2026 10:03 AM IST
BMW हिट एंड रन केस में मिहिर शाह को बड़ा झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
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मुंबई। महाराष्ट्र के चर्चित वर्ली BMW हिट एंड रन मामले में आरोपी मिहिर शाह को अदालत से बड़ा झटका लगा है। मुंबई की सेशन कोर्ट ने वर्ष 2024 में हुए इस सड़क हादसे से जुड़े मामले में मिहिर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में गवाहों से पूछताछ की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। यह मामला 7 जुलाई 2024 को मुंबई के वर्ली इलाके में हुए सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि उसका पति घायल हो गया था। घटना के बाद आरोपी मिहिर शाह कथित तौर पर मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने उसे दो दिन बाद गिरफ्तार किया था।

जानकारी के अनुसार, मिहिर शाह पालघर के एक राजनीतिक नेता का बेटा है। उस पर आरोप है कि 7 जुलाई 2024 को उसने मुंबई के वर्ली इलाके में अपनी BMW कार से एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी। स्कूटर पर प्रदीप नखवा और उनकी पत्नी कावेरी नखवा सवार थे। इस हादसे में प्रदीप घायल हो गए, जबकि उनकी पत्नी कावेरी की मौत हो गई। घटना की गंभीरता और हादसे के बाद सामने आए आरोपों के कारण यह मामला काफी चर्चा में रहा।

अभियोजन के अनुसार, BMW कार की टक्कर के बाद कावेरी नखवा कार के बोनट पर फंस गई थीं। आरोप है कि उन्हें करीब डेढ़ किलोमीटर तक घसीटा गया। इस घटना में उनकी जान चली गई। हादसे के दौरान स्कूटर चला रहे उनके पति प्रदीप नखवा घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की और आरोपियों की तलाश की।

इस मामले में मिहिर शाह पर हादसे के बाद घटनास्थल से फरार होने का भी आरोप है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 7 जुलाई 2024 को दुर्घटना होने के बाद वह मौके से चला गया था। पुलिस ने उसे 9 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया। इस प्रकार हादसे के दो दिन बाद मिहिर शाह पुलिस की गिरफ्त में आया।

घटना के समय BMW कार में मौजूद चालक राजऋषि बिदावत को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी हादसे वाले दिन यानी 7 जुलाई 2024 को ही कर ली गई थी। मामले में मिहिर शाह और राजऋषि बिदावत की भूमिका जांच और न्यायिक कार्यवाही का विषय बनी हुई है।

अब इस मामले में मिहिर शाह ने अदालत से जमानत की मांग की थी, लेकिन सेशन कोर्ट ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद मिहिर शाह को फिलहाल जमानत नहीं मिल सकी है। हालांकि, अदालत ने मामले की सुनवाई से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान देते हुए अभियोजन पक्ष को गवाहों से पूछताछ की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

गवाहों से पूछताछ किसी भी आपराधिक मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इस प्रक्रिया के दौरान अदालत के समक्ष मामले से संबंधित साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए जाते हैं। अभियोजन पक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य और गवाहों को न्यायालय के सामने पेश करे। ऐसे में अदालत द्वारा गवाहों से पूछताछ तेज करने का निर्देश मामले की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अदालत ने मिहिर शाह की जमानत याचिका किन विशेष आधारों पर खारिज की। इसी तरह अदालत ने गवाहों से पूछताछ पूरी करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित की है या नहीं, इसका भी विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए अदालत के आदेश के संबंध में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

वर्ली में हुआ यह सड़क हादसा इसलिए भी गंभीर था, क्योंकि इसमें स्कूटर सवार महिला की मौत हो गई थी। आरोपों के अनुसार, कार की टक्कर के बाद कावेरी नखवा को करीब डेढ़ किलोमीटर तक घसीटा गया था। इस घटना ने सड़क हादसों में वाहन चालकों की जिम्मेदारी और दुर्घटना के बाद उनके आचरण जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया था।

हादसे में घायल प्रदीप नखवा अपनी पत्नी कावेरी के साथ स्कूटर पर सवार थे। BMW कार की कथित टक्कर के कारण उनका परिवार इस दुखद घटना का शिकार हुआ। कावेरी की मौत और प्रदीप के घायल होने के बाद यह मामला पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही तक पहुंचा।

इस मामले में आरोपी मिहिर शाह की गिरफ्तारी भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम रही। हादसे के बाद उसके कथित तौर पर फरार होने और दो दिन बाद पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। वहीं, कार में मौजूद राजऋषि बिदावत को घटना वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।

अब अदालत के ताजा फैसले ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है। मिहिर शाह को जमानत देने से इनकार किए जाने के साथ अभियोजन पक्ष को गवाहों से पूछताछ तेज करने का निर्देश दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि अदालत ने मामले में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया है।

किसी आपराधिक मामले में जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होता है। मिहिर शाह के मामले में भी आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक कार्यवाही के बाद ही होगा।

वर्ली BMW हिट एंड रन मामले में अदालत के सामने अब गवाहों से पूछताछ की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। अभियोजन पक्ष को अदालत के निर्देश के अनुरूप इस प्रक्रिया में तेजी लानी होगी। मामले से जुड़े गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में घटनास्थल की परिस्थितियां, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं। वर्ली मामले में भी अदालत को अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपों का परीक्षण करना होगा। फिलहाल मिहिर शाह के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायिक विचाराधीन हैं।

मामले में कावेरी नखवा की मौत और प्रदीप नखवा के घायल होने की घटना न्यायिक कार्यवाही का केंद्र है। अभियोजन पक्ष को अदालत में अपने आरोपों को साबित करना होगा, जबकि आरोपी को अपना बचाव प्रस्तुत करने का अधिकार है। अदालत ने जमानत पर निर्णय देते हुए गवाहों से पूछताछ तेज करने का निर्देश दिया है।

फिलहाल मुंबई की सेशन कोर्ट के फैसले के बाद मिहिर शाह को जमानत नहीं मिली है। वर्ष 2024 के वर्ली BMW हिट एंड रन मामले में अब गवाहों से पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। 7 जुलाई 2024 को हुए इस हादसे में कावेरी नखवा की मौत हुई थी और उनके पति प्रदीप नखवा घायल हुए थे। हादसे के दो दिन बाद गिरफ्तार किए गए मिहिर शाह के खिलाफ मामला अदालत में विचाराधीन है। अब आगामी न्यायिक कार्यवाही में गवाहों के बयान और साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

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