महाराष्ट्र

POCSO कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप केस में बंद आरोपी को NEET रीटेस्ट देने के लिए मिली अंतरिम जमानत

Kavita2
19 Jun 2026 11:00 AM IST
POCSO कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप केस में बंद आरोपी को NEET रीटेस्ट देने के लिए मिली अंतरिम जमानत
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Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई की एक विशेष POCSO कोर्ट ने एक अहम आदेश में 18 वर्षीय युवक को NEET रीटेस्ट में शामिल होने की अनुमति दे दी है। यह रीटेस्ट 21 जून को होना है। आरोपी फिलहाल रेप के आरोप में नवी मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल में बंद है।

कोर्ट ने युवक को परीक्षा में शामिल होने के लिए चार दिन की अंतरिम जमानत दी है। यह जमानत 18 जून से 21 जून तक के लिए लागू रहेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल परीक्षा में शामिल होने के उद्देश्य से दी गई है।

जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने यह अंतरिम जमानत 50,000 रुपये के बॉन्ड और उतनी ही राशि की जमानत शर्त पर मंजूर की है। अदालत ने आदेश में यह भी कहा है कि इस अवधि के दौरान आरोपी को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा और वह केवल परीक्षा से संबंधित कार्यों के लिए ही जेल से बाहर रहेगा।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, परीक्षा समाप्त होने के बाद आरोपी को 22 जून को दोपहर 2 बजे से पहले संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना अनिवार्य होगा। इसके बाद वह फिर से न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा।

यह मामला एक रेप केस से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते आरोपी पहले से ही तलोजा सेंट्रल जेल में बंद था। हालांकि, शिक्षा और परीक्षा में शामिल होने के अधिकार को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सीमित अवधि की राहत देने का फैसला किया।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी संकेत दिया कि अंतरिम जमानत केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जा रही है और इसका उद्देश्य केवल परीक्षा में शामिल होने की सुविधा देना है, न कि मामले में किसी प्रकार की रियायत प्रदान करना।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर आरोपी के शिक्षा के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं। हालांकि, यह राहत पूरी तरह सीमित समय और सख्त शर्तों के साथ दी जाती है ताकि कानून व्यवस्था पर कोई असर न पड़े।

इस फैसले के बाद मामला कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर जहां परीक्षा में शामिल होने की अनुमति को शिक्षा के अधिकार से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गंभीर आपराधिक आरोपों के बीच इस तरह की राहत पर अलग-अलग राय भी सामने आ रही हैं।

फिलहाल कोर्ट के आदेश के अनुसार आरोपी को तय समय सीमा के भीतर परीक्षा देने और फिर से जेल प्रशासन के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है।

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