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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम, अमित शाह से मिले NCP के 6 दिग्गज नेता

Kavita2
3 Nov 2026 12:12 PM IST
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम, अमित शाह से मिले NCP के 6 दिग्गज नेता
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मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर नेतृत्व और आपसी तालमेल को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। इस बैठक में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार तथा उनके बेटे पार्थ पवार और जय पवार मौजूद नहीं थे। उनकी गैरमौजूदगी के बाद पार्टी में आंतरिक मतभेदों और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, एनसीपी ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि पार्टी में किसी तरह की टूट या नेतृत्व को लेकर टकराव नहीं है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने रविवार देर रात से सोमवार, 2 नवंबर 2026 के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे, वरिष्ठ नेता छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे शामिल थे।

इन नेताओं की एक साथ दिल्ली पहुंचकर अमित शाह से मुलाकात को महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एनसीपी राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है।

बैठक के बाद सबसे अधिक चर्चा इस बात की हुई कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल क्यों नहीं थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं की राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख सहयोगी नेता से मुलाकात राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष की गैरमौजूदगी स्वाभाविक रूप से सवाल पैदा करती है।

हालांकि, केवल किसी बैठक में शामिल नहीं होने के आधार पर पार्टी में मतभेद होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। एनसीपी नेतृत्व ने भी इसी आधार पर आंतरिक कलह की चर्चाओं को गलत बताया है।

बैठक के पीछे महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय का विभाग एनसीपी को वापस दिए जाने की मांग को भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि सरकार में एनसीपी की भूमिका और प्रशासनिक हिस्सेदारी को लेकर बातचीत आवश्यक है।

रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान वित्त विभाग से जुड़े मुद्दों के अलावा पार्टी की संगठनात्मक स्थिति और महायुति के भीतर बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई।

महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी की भूमिका पिछले कुछ वर्षों से लगातार बदलती रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व, गठबंधन और संगठनात्मक निर्णयों को लेकर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ चुके हैं।

अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी के भविष्य को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं की अलग बैठक को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग संगठन के कामकाज और पार्थ पवार के बढ़ते प्रभाव से असहज है। हालांकि, इन दावों की पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के अनुभवी नेताओं की भूमिका और महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भागीदारी को लेकर असंतोष हो सकता है।

बताया जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह के सामने महायुति गठबंधन में समन्वय और एनसीपी के संगठनात्मक मुद्दों को रखा। हालांकि, बैठक में हुई विस्तृत बातचीत का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

दूसरी ओर, पार्टी ने नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। एनसीपी के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को जानबूझकर बैठक से दूर रखा गया।

उमेश पाटिल के अनुसार, पार्टी के भीतर मतभेद होने की बातों को अनावश्यक राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने ऐसे दावों को गलत और भ्रामक बताया है।

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में काम करती रहेगी और महायुति गठबंधन को मजबूत करने के लिए प्रयास जारी रखेगी।

एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं की इस मुलाकात का एक महत्वपूर्ण पहलू महाराष्ट्र सरकार में विभागों के बंटवारे और राजनीतिक संतुलन से भी जुड़ा है।

महायुति में भाजपा के अलावा अन्य सहयोगी दल भी शामिल हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण विभागों का आवंटन और सरकार के भीतर राजनीतिक समन्वय लगातार चर्चा का विषय बना रहता है।

वित्त मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग को लेकर किसी सहयोगी दल की मांग राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस विभाग का संबंध राज्य के बजट, सरकारी खर्च और विकास योजनाओं के लिए धनराशि के आवंटन से होता है। इसलिए इसे लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत होना असामान्य नहीं है।

हालांकि, वित्त मंत्रालय से जुड़ी मांग और एनसीपी में कथित आंतरिक मतभेद दो अलग-अलग मुद्दे हैं। इन्हें एक ही राजनीतिक विवाद का हिस्सा मानने से पहले आधिकारिक तथ्यों पर ध्यान देना जरूरी है।

सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि भाजपा नेतृत्व चाहता है कि एनसीपी के भीतर बेहतर तालमेल बना रहे, ताकि महायुति सरकार और गठबंधन की स्थिरता प्रभावित न हो।

राजनीतिक दृष्टि से यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल दलों के बीच समन्वय सरकार के कामकाज और भविष्य की चुनावी रणनीति पर असर डाल सकता है।

किसी भी गठबंधन में सहयोगी दलों के बीच संवाद और मतभेदों का समाधान आवश्यक होता है। एनसीपी के मामले में भी वरिष्ठ नेताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद एनसीपी में किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता को लेकर भी पार्टी ने कोई बदलाव घोषित नहीं किया है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन या पार्टी में टूट की चर्चाएं फिलहाल राजनीतिक अटकलों तक सीमित हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली में हुई बैठक के बाद एनसीपी और महायुति गठबंधन में क्या राजनीतिक बदलाव दिखाई देते हैं। पार्टी नेतृत्व ने जहां मतभेदों से इनकार किया है, वहीं वरिष्ठ नेताओं की अलग बैठक ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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