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दिशा सालियान मामले में बड़ा आदेश CBI करेगी मौत की जांच
Ratna Netam
2 Sept 2026 4:47 PM IST

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मुंबई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर **दिशा सालियान** की मौत के मामले में छह साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को दिशा की मौत की जांच **केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)** को सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने CBI को FIR दर्ज करने, दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान लेने और मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों की नए सिरे से जांच करने को कहा है। जांच के लिए एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है।
यह मामला राजनीतिक रूप से इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि दिशा के पिता ने अपनी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता **आदित्य ठाकरे** समेत अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए थे और FIR की मांग की थी। हालांकि हाई कोर्ट ने बेहद महत्वपूर्ण बात साफ कर दी है—सिर्फ किसी का नाम लेने या आरोप लगाए जाने से उसे आरोपी नहीं माना जाएगा। CBI जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मिलने के बाद ही उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है। इसलिए फिलहाल आदित्य ठाकरे को इस मामले में आरोपी या दोषी बताना गलत होगा।
8 जून 2020 को हुई थी दिशा की मौत
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके की एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। वह उस समय 28 वर्ष की थीं और मनोरंजन जगत में सेलिब्रिटी मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी थीं। वह कुछ समय के लिए सुशांत सिंह राजपूत से भी पेशेवर तौर पर जुड़ी थीं।
दिशा की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने Accidental Death Report यानी ADR दर्ज की थी। बाद की पुलिस जांच में किसी आपराधिक साजिश का आधार नहीं मिलने की बात कही गई और मौत को आत्महत्या माना गया था।
लेकिन दिशा के पिता सतीश सालियान बाद में पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने बेटी की मौत को संदिग्ध बताते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
ठीक 6 दिन बाद हुई थी सुशांत सिंह राजपूत की मौत
दिशा की मौत के ठीक छह दिन बाद यानी **14 जून 2020** को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत मिले थे।
दोनों मौतों के बीच केवल छह दिन का अंतर और दिशा का सुशांत के साथ पहले पेशेवर जुड़ाव होने के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में दोनों घटनाओं को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। बॉम्बे हाई कोर्ट के ताजा आदेश ने दिशा और सुशांत की मौत के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं की है। CBI जांच का आदेश दिशा की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र पड़ताल के लिए दिया गया है।
इसलिए दोनों मामलों के बीच संबंध होने का दावा जांच के निष्कर्ष के बिना नहीं किया जा सकता।
पिता ने हाई कोर्ट में लगाए गंभीर आरोप
सतीश सालियान ने हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में बेटी की मौत को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिशा के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए मामले को दबाया गया।
ये फिलहाल **याचिकाकर्ता के आरोप** हैं, सिद्ध तथ्य नहीं।
मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पहले अदालत में कहा गया था कि जांच में हत्या, यौन हमले या आपराधिक साजिश को साबित करने वाला ठोस सबूत नहीं मिला था।
अब CBI को इन परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र जांच करनी होगी।
हाई कोर्ट ने पुलिस जांच पर क्यों उठाए सवाल?
CBI जांच का आदेश अचानक नहीं आया। मामले की पिछली सुनवाइयों में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए थे।
अदालत ने पूछा था कि अगर परिवार गंभीर आरोप लगा रहा था तो नियमित FIR दर्ज करने में क्या बाधा थी। कोर्ट ने CrPC की धारा 174 के तहत ADR की प्रक्रिया इतने लंबे समय तक जारी रहने की कानूनी उपयोगिता पर भी सवाल किया था।
अदालत के सामने पोस्टमार्टम, घटनास्थल और कुछ गवाहों के बयानों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे।
28 अगस्त की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 2 सितंबर को CBI जांच का आदेश सुनाया गया।
CBI को क्या-क्या करना होगा?
हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI को केवल पुराने दस्तावेज देखने तक सीमित नहीं रहना होगा। अदालत ने जांच अधिकारी को दिशा की मौत से जुड़ी **सभी परिस्थितियों** की जांच करने का निर्देश दिया है।
CBI को सबसे पहले सतीश सालियान का बयान दर्ज करना होगा और FIR दर्ज करनी होगी। इसके बाद पुराने पुलिस रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़े दस्तावेज तथा उपलब्ध अन्य सामग्री की जांच की जा सकती है।
मालवणी पुलिस स्टेशन को भी मामले से जुड़े सभी कागजात CBI को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
अगर जांच में किसी संज्ञेय अपराध और किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत सामने आते हैं तो एजेंसी कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करेगी।
कोर्ट ने क्यों कहा बिना सबूत किसी को आरोपी न बनाएं?
इस आदेश का सबसे अहम हिस्सा यही है।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि जांच अधिकारी को जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सामग्री नहीं मिलती, तब तक उसे आरोपी नहीं माना जाए।
इसका सीधा मतलब है कि FIR और CBI जांच का आदेश अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका स्थापित नहीं करता।
मामला लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रहा है और अलग-अलग नेताओं के नाम सार्वजनिक बयानबाजी में लिए जाते रहे हैं। अदालत ने इसी पृष्ठभूमि में जांच को सबूतों पर आधारित रखने पर जोर दिया है।
आदित्य ठाकरे का नाम क्यों चर्चा में है?
दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे के खिलाफ भी FIR दर्ज करने की मांग की थी। उनके वकील ने सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे सहित कई लोगों के नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए।
आदित्य ठाकरे की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया है। उनके वकील ने कार्यवाही को राजनीति से प्रेरित बताया था और यह तर्क दिया था कि सत्ता परिवर्तन के बाद मामले को फिर से उठाया गया।
अब CBI जांच के कारण आदित्य ठाकरे का नाम फिर राजनीतिक चर्चा में जरूर आएगा, लेकिन कानूनी रूप से उनकी स्थिति को लेकर अदालत का निर्देश बिल्कुल स्पष्ट है—**पर्याप्त सबूत के बिना किसी को आरोपी नहीं बनाया जाए।**
क्या आदित्य ठाकरे की मुश्किल बढ़ गई?
राजनीतिक और कानूनी पहलू को अलग-अलग समझना जरूरी है।
राजनीतिक रूप से CBI जांच का आदेश आदित्य ठाकरे और शिवसेना (UBT) पर उनके विरोधियों का दबाव बढ़ा सकता है। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के प्रतिद्वंद्वी नेता पहले भी दिशा सालियान मामले को लेकर आदित्य ठाकरे पर आरोप लगाते रहे हैं। अब CBI जांच शुरू होने से यह मुद्दा दोबारा राजनीतिक बहस में आ सकता है।
लेकिन **कानूनी तौर पर अभी यह कहना सही नहीं होगा कि आदित्य ठाकरे की मुश्किल बढ़ गई है या उनके खिलाफ मामला बन गया है।**
हाई कोर्ट ने न तो उन्हें दोषी माना है और न ही उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें आरोपी बनाने का निर्देश दिया है। उल्टा अदालत ने साफ कहा है कि जांच में पर्याप्त सामग्री मिलने के बाद ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाए।
इसलिए आगे की स्थिति पूरी तरह CBI जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
मुंबई पुलिस ने पहले क्या पाया था?
मुंबई पुलिस ने दिशा की मौत के बाद ADR दर्ज कर जांच की थी। बाद में पुलिस का निष्कर्ष था कि मामले में किसी तरह का foul play सामने नहीं आया और दिशा की मौत आत्महत्या से हुई थी। फरवरी 2021 की क्लोजर रिपोर्ट में भी कुछ संदिग्ध नहीं मिलने की बात कही गई थी।
बाद में महाराष्ट्र सरकार ने मामले की दोबारा जांच के लिए SIT का गठन किया था। पुलिस की ओर से हाई कोर्ट को बताया गया था कि पोस्टमार्टम और अन्य जांच में यौन या शारीरिक हमले का प्रमाण नहीं मिला।
दूसरी तरफ सतीश सालियान इन निष्कर्षों को स्वीकार नहीं करते और उनका आरोप है कि मूल जांच में गंभीर कमियां थीं।
अब CBI के सामने दोनों पक्षों से जुड़े रिकॉर्ड और दावों की जांच करने की जिम्मेदारी होगी।
CBI को कुछ नहीं मिला तो क्या होगा?
हाई कोर्ट ने इस संभावना को भी अपने आदेश में शामिल किया है।
अदालत ने कहा है कि अगर CBI की जांच में कोई आपराधिक मामला नहीं बनता तो एजेंसी संबंधित अदालत के सामने उचित **समरी या अंतिम रिपोर्ट** दाखिल कर सकती है।
इसके बाद दिशा के पिता को उस रिपोर्ट को चुनौती देने का अधिकार होगा। वह विरोध याचिका यानी protest petition दाखिल कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का अर्थ है कि CBI जांच का आदेश हत्या या दूसरे आरोपों की पुष्टि नहीं है। जांच के बाद एजेंसी यह निष्कर्ष भी निकाल सकती है कि अपराध का मामला नहीं बनता।
छह साल बाद सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
दिशा सालियान की मौत को छह वर्ष से अधिक समय गुजर चुका है। ऐसे में CBI के लिए सबसे बड़ी चुनौती पुराने साक्ष्यों और रिकॉर्ड की उपलब्धता तथा उनकी विश्वसनीयता होगी।
एजेंसी को 2020 की मूल पुलिस जांच, घटनास्थल से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और उपलब्ध डिजिटल सामग्री की समीक्षा करनी होगी। जरूरत पड़ने पर पुराने गवाहों से दोबारा पूछताछ भी जांच का हिस्सा हो सकती है।
हाई कोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारी को जांच सौंपने का निर्देश देकर मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित किया है।
अब आगे क्या?
बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद मामला अब CBI के हाथ में जाएगा। मुंबई पुलिस को अपने रिकॉर्ड एजेंसी को सौंपने होंगे और CBI को FIR दर्ज करके नए सिरे से जांच आगे बढ़ानी होगी।
दिशा सालियान की मौत 2020 से ही विवाद और अटकलों से घिरी रही है। सुशांत सिंह राजपूत की छह दिन बाद हुई मौत के कारण मामला और ज्यादा चर्चित हुआ। लेकिन छह साल बाद भी इस केस में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना बेहद जरूरी है।
आदित्य ठाकरे का नाम दिशा के पिता की याचिका और उनके वकील के आरोपों में जरूर है, लेकिन हाई कोर्ट ने किसी व्यक्ति को दोषी या आरोपी घोषित नहीं किया है। अब CBI की जांच ही तय करेगी कि दिशा सालियान की मौत में कोई आपराधिक पहलू था या पहले की पुलिस जांच का निष्कर्ष सही था।
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