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मुंबई एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी का बड़ा खुलासा, अंडरगारमेंट में छिपाकर लाया 1.44 किलो सोना

मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोने की तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। कस्टम्स अधिकारियों ने एयरलाइन की एक महिला कर्मचारी और श्रीलंका के एक नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट के जरिए सोने की तस्करी करने वाले नेटवर्क से जुड़े हुए थे। तलाशी के दौरान श्रीलंकाई यात्री के अंडरगारमेंट में छिपाकर रखा गया 1,445 ग्राम सोने का बुरादा बरामद किया गया। मामले में गिरफ्तार महिला कर्मचारी की पहचान एन. यादव (30) के रूप में हुई है, जो महाराष्ट्र के भिवंडी की रहने वाली है। वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान मोहम्मद उस्मान मोहम्मद हनीफा (43) के रूप में हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, खुफिया जानकारी और यात्रियों की प्रोफाइलिंग के आधार पर यह कार्रवाई की गई। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि एयरपोर्ट के भीतर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों की मदद से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों द्वारा सोने की तस्करी की जा रही है। इसी सूचना पर निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद दोनों को पकड़ लिया गया।
खुफिया जानकारी के आधार पर बिछाया गया जाल
मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को सोने की तस्करी से संबंधित महत्वपूर्ण सूचना मिली थी। इसके आधार पर अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही थी।
अधिकारियों को संदेह था कि कुछ यात्री विदेश से सोना लेकर मुंबई पहुंचते हैं और एयरपोर्ट के भीतर ही कर्मचारियों की मदद से उसे बाहर निकालने का प्रयास करते हैं।
सूचना के आधार पर सुरक्षा अधिकारियों ने संदिग्ध ट्रांजिट मार्ग की निगरानी शुरू की। इस दौरान एयरलाइन की महिला कर्मचारी एन. यादव और श्रीलंकाई यात्री मोहम्मद उस्मान मोहम्मद हनीफा की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं।
इसके बाद अधिकारियों ने दोनों को एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्र में रोककर पूछताछ शुरू की।
अंडरगारमेंट में छिपाकर रखा था सोने का बुरादा
दोनों संदिग्धों को रोकने के बाद अधिकारियों ने उनकी तलाशी ली। इस दौरान श्रीलंकाई यात्री के अंडरगारमेंट में छिपाकर रखा गया सोने का बुरादा बरामद हुआ।
जब्त सामग्री का वजन 1,445 ग्राम बताया गया है। अधिकारियों ने सोने को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी।
सोने के बुरादे को छिपाकर ले जाने का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुट गई हैं कि इसे कहां से लाया गया था और किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
हालांकि, तस्करी के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका अभी जांच का विषय है।
एयरलाइन कर्मचारी की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू एयरलाइन की महिला कर्मचारी की कथित संलिप्तता है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, एन. यादव पर आरोप है कि वह एयरपोर्ट के भीतर यात्री से सोना प्राप्त करके उसे बाहर पहुंचाने में सहयोग कर रही थी।
पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, महिला कर्मचारी ने कथित तौर पर पहले से तय भुगतान के बदले यात्री से सोना लेने की बात स्वीकार की।
वहीं, श्रीलंकाई यात्री ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह विदेश में सक्रिय एक तस्करी नेटवर्क के लिए सोना लेकर आया था।
अधिकारियों ने दोनों के बयान दर्ज किए हैं। हालांकि, पूछताछ में सामने आई बातों की पुष्टि अन्य साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट का इस्तेमाल करने की आशंका
जांच एजेंसियों को संदेह है कि तस्करी के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा था।
अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट यात्री आमतौर पर एक देश से दूसरे देश जाने के दौरान किसी तीसरे देश के हवाई अड्डे पर अगली उड़ान का इंतजार करते हैं।
ऐसे यात्रियों को निर्धारित अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट क्षेत्र में रहने की अनुमति होती है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि तस्करी करने वाले गिरोह कुछ मामलों में इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं।
इस मामले में भी आशंका है कि श्रीलंकाई यात्री के पास मौजूद सोना एयरपोर्ट के भीतर ही किसी कर्मचारी को सौंपा जाना था, ताकि उसे बाहर पहुंचाया जा सके।
अधिकारियों ने इस संभावित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए जांच आगे बढ़ाई है।
लिफ्ट के पास संदिग्ध लेनदेन पर हुई कार्रवाई
इस घटना से संबंधित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, 21 अक्टूबर को एयरपोर्ट के बोर्डिंग गेट नंबर 65 के पास स्थित लिफ्ट में संदिग्ध लेनदेन होने की सूचना मिली थी।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों ने एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट यात्री और एयरलाइन कर्मचारी को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रोका।
इस कार्रवाई में सोने के पेस्ट से संबंधित तीन अंडाकार पैकेट बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
इस रिपोर्ट में बरामद सामग्री का वजन लगभग 1,490 ग्राम और अनुमानित मूल्य 1.83 करोड़ रुपये बताया गया है।
हालांकि, कस्टम्स से संबंधित दूसरी रिपोर्ट में सोने के बुरादे का वजन 1,445 ग्राम दर्ज है। दोनों आंकड़ों में अंतर होने के कारण अंतिम जब्ती विवरण की पुष्टि संबंधित एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड से होगी।
विदेश में बैठे तस्करों तक पहुंचने की कोशिश
कस्टम्स अधिकारियों का मानना है कि इस मामले की जांच केवल गिरफ्तार दोनों आरोपियों तक सीमित नहीं रह सकती।
जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सोना किस देश से लाया गया था और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि एयरपोर्ट के भीतर अन्य कर्मचारियों की कोई भूमिका थी या नहीं।
अधिकारियों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या इससे पहले इसी तरीके से सोने की तस्करी की गई थी।
इस संबंध में आरोपियों की गतिविधियों, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का अध्ययन किया जा सकता है।
मुंबई एयरपोर्ट पर पहले भी पकड़े गए तस्करी के मामले
मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाल के महीनों में सोने की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं।
सितंबर 2026 में राजस्व खुफिया निदेशालय ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए ट्रांजिट यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।
उस कार्रवाई में मोम के रूप में छिपाया गया लगभग 3.47 किलोग्राम सोने का बुरादा बरामद हुआ था।
जांच में पता चला था कि कुछ आरोपी अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट क्षेत्र में सोना प्राप्त कर उसे एयरपोर्ट से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे।
इन घटनाओं ने हवाई अड्डों के भीतर कर्मचारियों की मिलीभगत से होने वाली संभावित तस्करी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी सतर्कता
एयरपोर्ट कर्मचारियों से जुड़े तस्करी के मामलों को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों की पहुंच कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों तक होती है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी की तस्करी में संलिप्तता सामने आती है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
इसी वजह से संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और यात्रियों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कस्टम्स अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानून के तहत कार्रवाई शुरू की है।
फिलहाल जांच एजेंसियां बरामद सोने के स्रोत, संभावित खरीदार और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में कितने अन्य लोग शामिल थे और तस्करी का नेटवर्क कितना बड़ा था।





