महाराष्ट्र

गोवा विला से साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

Kavita2
7 Aug 2026 10:05 AM IST
गोवा विला से साइबर ठगी का बड़ा खुलासा
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मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड और गैर-कानूनी ऑनलाइन गेमिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच की टीम ने गोवा के कैंडोलिम स्थित एक आलीशान विला में छापेमारी कर 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह गिरोह पिछले छह महीनों से साइबर अपराध के जरिए हासिल की गई 500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर कर मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा था।

क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के दौरान इस रैकेट से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में मौजूद करीब 100 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, इनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और पैसों के लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी एक सुनियोजित तरीके से साइबर फ्रॉड और अवैध ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों को संचालित कर रहे थे। आरोपियों ने गोवा के कैंडोलिम में स्थित एक महंगे विला को किराए पर लिया था, जहां से इस पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, यह विला सामान्य रहने के लिए नहीं बल्कि साइबर अपराध की गतिविधियों को अंजाम देने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि गिरोह में शामिल लोगों को अपराध में शामिल करने से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों को लगभग 15 दिनों तक ट्रेनिंग दी गई, जिसमें उन्हें कई बैंक खातों के माध्यम से तेजी से पैसे ट्रांसफर करने, लेनदेन छिपाने और साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के तरीके सिखाए गए थे।

पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में शामिल आरोपी कुछ ही मिनटों में बड़ी रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर करने की क्षमता रखते थे। इसके लिए वे अलग-अलग खातों, डिजिटल माध्यमों और अन्य वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल करते थे, ताकि जांच एजेंसियों को लेनदेन की वास्तविक जानकारी आसानी से न मिल सके।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस सिंडिकेट का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर फ्रॉड से जुटाई गई रकम किन देशों या किन नेटवर्क के माध्यम से संचालित की जा रही थी। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि अवैध ऑनलाइन गेमिंग के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ।

मुंबई क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड और अवैध गेमिंग से जुड़े मामलों में तेजी आई है। अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने और बड़ी रकम को छिपाने के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन की जांच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में केवल अपराध करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उनके पूरे वित्तीय नेटवर्क की पहचान करना जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और संदिग्ध गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। फ्रीज किए गए 100 करोड़ रुपये की रकम इस जांच में महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकती है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया, कितने बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या देश के अन्य हिस्सों में भी इस नेटवर्क से जुड़े लोग सक्रिय हैं।

क्राइम ब्रांच की टीम ने बताया कि डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ और जांच आगे बढ़ने के बाद इस सिंडिकेट से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

मुंबई क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी, अवैध गेमिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बदल रहे हैं, ऐसे में जांच एजेंसियां भी आधुनिक तरीकों से ऐसे नेटवर्क पर नजर रख रही हैं।

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