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महाराष्ट्र
अस्पताल हिंसा केस में बड़ा एक्शन विधायक के बेटे समेत 13 आरोपी गिरफ्तार
nidhi
12 Sept 2026 6:48 AM IST

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अस्पताल हिंसा का मामला
मुंबई: महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक निजी अस्पताल में कर्मचारियों से कथित मारपीट और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को शिवसेना विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित समेत 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात को 7 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और बाद में पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। मामले में कुल 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
घटना 5 और 6 सितंबर की दरमियानी रात पालघर के रिलीफ अस्पताल में हुई थी। दही हांडी उत्सव में घायल हुए कुछ ‘गोविंदा’ इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे। आरोप है कि इलाज और अस्पताल के बिल को लेकर विवाद के बाद शिवसेना से जुड़े कुछ लोग अस्पताल में घुस गए। उन्होंने कथित तौर पर अस्पताल की संपत्ति में तोड़फोड़ की डॉक्टरों को धमकाया कर्मचारियों के साथ मारपीट की और आईसीयू में भर्ती एक घायल व्यक्ति को जबरन अपने साथ ले गए।
पुलिस की कार्रवाई में विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए लोगों में 12 दही हांडी प्रतिभागी भी शामिल हैं। इससे पहले राहुल घरात की गिरफ्तारी हो चुकी थी। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर घटना में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस की जांच पर हाईकोर्ट नाराज
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर पुलिस की जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने जांच को बेहद लापरवाहीपूर्ण और गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि अब तक की गई कार्रवाई सतही दिखाई देती है और इससे आरोपियों को फायदा पहुंचने की आशंका पैदा होती है। हाईकोर्ट ने खास तौर पर घटनास्थल के पंचनामे और केस डायरी की प्रविष्टियों पर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित और जब्त क्यों नहीं किया गया। आईसीयू में भर्ती मरीज की सलाइन हटाए जाने के आरोप का जिक्र करते हुए भी कोर्ट ने जांच की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए।
17 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने कोंकण डिवीजन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को जांच की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का निर्देश दिया है। अधिकारी को मामले की जांच का परीक्षण कर 17 सितंबर को अदालत के सामने रिपोर्ट पेश करनी होगी। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि पालघर पुलिस की अब तक की कार्रवाई कानूनी रूप से उचित थी या नहीं।
अस्पताल में हुई हिंसा का मामला उस समय हाईकोर्ट के सामने आया जब अदालत पहले से ठाणे के एक अस्पताल में डॉक्टरों पर हुए हमले से जुड़े मामले की स्वतः संज्ञान वाली सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान पालघर की घटना की जानकारी अदालत को दी गई। हाईकोर्ट ने अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस के रवैये पर गंभीर चिंता जाहिर की है। पुलिस अब घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश के साथ सीसीटीवी फुटेज डिजिटल और भौतिक सबूतों की जांच कर रही है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मामले की जांच पर वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी नजर रहेगी।
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