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Customs विभाग की बड़ी कार्रवाई, 3.52 करोड़ के काजू आयात घोटाले में क्लियरिंग एजेंट गिरफ्तार

Maharashtra महाराष्ट्र: स्पेशल इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (SIIB) (इम्पोर्ट), जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस (JNCH), न्हावा शेवा ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक क्लियरिंग एजेंट को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने जानबूझकर आयातित टूटे काजू की गिरी को गलत तरीके से घोषित किया और उसे छिपाने की कोशिश की, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ है।
कस्टम विभाग के अनुसार, इस पूरे मामले में जब्त या जांच के दायरे में आई वस्तुओं की बाजार कीमत लगभग 3.52 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि इस कथित हेराफेरी के कारण सरकारी खजाने को करीब 1.4 करोड़ रुपये के कस्टम ड्यूटी का नुकसान हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, SIIB (इम्पोर्ट) को विशेष खुफिया जानकारी प्राप्त हुई थी कि एक कंपनी द्वारा आयात किए गए कंसाइनमेंट में टूटे काजू की गिरी को जानबूझकर गलत तरीके से घोषित किया गया था। आरोप है कि इसे काजू की भूसी के पेलेट्स के साथ मिलाकर छिपाया गया ताकि कस्टम जांच से बचा जा सके और कम ड्यूटी चुकाई जा सके।
इस सूचना के आधार पर विभाग ने जांच शुरू की और भांडुप निवासी एक क्लियरिंग एजेंट को समन जारी किया गया। जांच के दौरान जब आरोपी समन के जवाब में पेश हुआ तो उसका विस्तृत बयान दर्ज किया गया। पूछताछ में उसने आयात से जुड़े ट्रांजैक्शन में अपनी भूमिका को लेकर कई अहम खुलासे और स्वीकारोक्ति की।
अधिकारियों के अनुसार, बयान के दौरान आरोपी ने यह स्वीकार किया कि वह संबंधित आयात प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी की भूमिका केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह पूरी शिपमेंट की फाइनेंसिंग और क्लीयरेंस प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ था।
कस्टम अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य टैक्स चोरी करना और कम मूल्य दिखाकर आयात शुल्क से बचना होता है। टूटे काजू की गिरी और काजू के भूसी पेलेट्स की गलत घोषणा करके वास्तविक मूल्य को छिपाने का प्रयास किया गया, ताकि कम कस्टम ड्यूटी का भुगतान किया जा सके।
जांच एजेंसी अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों और संबंधित कंपनी की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।
कस्टम विभाग ने कहा है कि आयात-निर्यात में किसी भी तरह की धोखाधड़ी और गलत घोषणा को गंभीर अपराध माना जाता है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं, क्योंकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।
सूत्रों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अक्सर क्लियरिंग एजेंट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे कस्टम क्लीयरेंस की पूरी प्रक्रिया को संभालते हैं। यदि दस्तावेजों में जानबूझकर गलत जानकारी दी जाती है, तो इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर पड़ता है।
फिलहाल आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ की जा रही है और सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस तरह के अन्य शिपमेंट पहले भी इसी तरीके से क्लियर किए गए हैं या नहीं।
कुल मिलाकर, न्हावा शेवा कस्टम हाउस की यह कार्रवाई एक बड़े आयात घोटाले की ओर इशारा करती है, जिसमें करोड़ों रुपये के माल की गलत घोषणा कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हुई हैं।





