- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- थुल घाट में बड़ा हादसा...

मुंबई। मानसून के दौरान रेलवे सुरक्षा को लेकर सेंट्रल रेलवे की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। सेंट्रल रेलवे की विशेष ‘हिल गैंग’ टीम ने महाराष्ट्र के थुल घाट सेक्शन में रेलवे ट्रैक के ऊपर खतरनाक स्थिति में लटके एक बड़े पत्थर को समय रहते हटाकर संभावित दुर्घटना को टाल दिया। यह कार्रवाई कसारा और इगतपुरी के बीच की गई, जहां भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन और चट्टानों के खिसकने का खतरा बना रहता है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मानसून के कठिन हालात में भी हिल गैंग की टीम संवेदनशील घाट क्षेत्रों में लगातार निगरानी और सुरक्षा जांच कर रही है। इसी नियमित निरीक्षण के दौरान टीम को थुल घाट सेक्शन में एक बड़ा और ढीला पत्थर दिखाई दिया, जो रेलवे ट्रैक के लिए गंभीर खतरा बन सकता था।
यह पत्थर अपनी जगह से खिसक गया था और रेलवे ट्रैक से करीब 15 मीटर ऊपर पहाड़ी ढलान पर खतरनाक तरीके से लटका हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, यदि यह पत्थर अचानक गिरता तो इससे गुजरने वाली ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता था।
रूटीन जांच के दौरान खतरे की पहचान होते ही हिल गैंग के कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। टीम ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पत्थर को हटाने का अभियान चलाया। भारी बारिश और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद कर्मचारियों ने सावधानीपूर्वक काम करते हुए इस बड़े पत्थर को सुरक्षित तरीके से हटाया।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि हटाए गए पत्थर की लंबाई करीब 3.9 मीटर थी। इतनी बड़ी चट्टान का रेलवे ट्रैक के ऊपर अस्थिर स्थिति में होना किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता था। समय पर की गई कार्रवाई से न केवल ट्रेन संचालन सुरक्षित रहा, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई।
सेंट्रल रेलवे की हिल गैंग टीम मानसून के दौरान घाट क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी का काम करती है। विशेष रूप से कर्जत-लोनावला और कसारा-इगतपुरी घाट सेक्शन जैसे संवेदनशील इलाकों में बारिश के समय चट्टानों के गिरने, मिट्टी खिसकने और जलभराव जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
इन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरता है, जहां भारी बारिश के कारण प्राकृतिक बदलाव तेजी से होते हैं। ऐसे में रेलवे की सुरक्षा टीम नियमित निरीक्षण कर संभावित खतरों की पहचान करती है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करती है।
सेंट्रल रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान ट्रेनों का सुरक्षित संचालन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए रेलवे कर्मचारी लगातार मौसम की स्थिति, ट्रैक की मजबूती और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की निगरानी करते हैं।
थुल घाट सेक्शन में हुई इस कार्रवाई को रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता और समर्पण का उदाहरण माना जा रहा है। यदि समय रहते इस खतरे का पता नहीं चलता तो लटका हुआ पत्थर ट्रेन संचालन के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता था।
रेलवे ने यात्रियों को सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने के लिए मानसून के दौरान विशेष इंतजाम किए हैं। घाट क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती, नियमित निरीक्षण और आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां की गई हैं।
रेलवे अधिकारियों ने हिल गैंग के कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उनकी तत्परता और मेहनत के कारण रेल सेवाएं सुचारु रूप से चल रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में काम करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन कर्मचारियों की सतर्कता से कई संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
मानसून के दौरान देश के कई पहाड़ी रेलवे मार्गों पर चट्टान गिरने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। ऐसे में रेलवे की सुरक्षा टीमें लगातार सक्रिय रहती हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहती हैं।
थुल घाट में बड़े पत्थर को हटाने की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रेलवे सुरक्षा केवल तकनीकी व्यवस्थाओं पर निर्भर नहीं होती, बल्कि मैदान में तैनात कर्मचारियों की सतर्कता और समय पर लिए गए फैसले भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
सेंट्रल रेलवे की इस कार्रवाई से कसारा-इगतपुरी मार्ग पर ट्रेन सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रहीं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। रेलवे प्रशासन ने भविष्य में भी मानसून के दौरान ऐसी सतर्कता और निगरानी जारी रखने की बात कही है।





