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Maharashtra : ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स में किसानों को उचित मुआवज़े के बाद ही काम पूरा होगा

Maharashtra महाराष्ट्र: ऊर्जा राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डिकर ने बुधवार को विधानसभा में भरोसा दिलाया कि राज्य में ट्रांसमिशन टावर और ओवरहेड लाइनों से जुड़े पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स तभी पूरे किए जाएंगे, जब प्रभावित किसानों को उचित और न्यायसंगत मुआवज़ा दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि सरकार किसानों के हितों की अनदेखी नहीं करेगी और सभी परियोजनाएं तय मुआवज़ा प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेंगी।
यह बयान MLA सुनील शेल्के द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दिया गया। मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुआवज़ा नीति में लगातार सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब किसानों को अधिक पारदर्शी और बाजार आधारित मुआवज़ा प्रणाली का लाभ मिल रहा है।
मंत्री के अनुसार, वर्ष 2022 में लागू की गई संशोधित मुआवज़ा नीति के तहत ट्रांसमिशन टावरों के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवज़ा कई मानकों के आधार पर तय किया जाता है। इसमें मौजूदा बाजार मूल्य, रेडी रेकनर दर या पिछले तीन वर्षों में गांव में दर्ज सबसे अधिक औसत भूमि लेन-देन की कीमत शामिल होती है। इन तीनों में से जो भी मूल्य सबसे अधिक होगा, उसी के आधार पर मुआवज़ा निर्धारित किया जाएगा।
इसके अलावा, किसानों को ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे आने वाली भूमि के लिए भी मुआवज़ा देने का प्रावधान किया गया है। इस नीति के अनुसार, किसानों को प्रभावित क्षेत्र की भूमि मूल्य का 30 प्रतिशत तक मुआवज़ा दिया जाता है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था किसानों को उनके नुकसान के लिए अधिक न्यायसंगत मुआवज़ा सुनिश्चित करती है।
साकोरे-बोर्डिकर ने सदन में यह भी बताया कि पहले की नीतियों में समय के साथ कई बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 2010 से पहले ऐसे किसी भी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए किसानों को कोई मुआवज़ा नहीं दिया जाता था, जिससे व्यापक असंतोष की स्थिति बनी रहती थी।
इसके बाद 2010 में पहली बार एक औपचारिक मुआवज़ा नीति लागू की गई, जिसके तहत बाजार मूल्य के 25 से 65 प्रतिशत तक मुआवज़ा देने का प्रावधान किया गया। यह किसानों के लिए पहली बड़ी राहत मानी गई।
आगे चलकर 2017 में नीति में फिर संशोधन किया गया। उस समय टावर लोकेशन के लिए रेडी रेकनर दर से दोगुना मुआवज़ा देने का प्रावधान किया गया, जबकि ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे की भूमि के लिए 15 प्रतिशत मुआवज़ा तय किया गया था। यह बदलाव किसानों की बढ़ती मांगों और भूमि उपयोग से जुड़े विवादों को देखते हुए किया गया था।
हालांकि, वर्तमान सरकार ने 2022 में इस नीति को और संशोधित करते हुए मुआवज़ा दरों में और बढ़ोतरी की है। नई व्यवस्था के तहत ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए मुआवज़ा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक कर दिया गया है, जिससे किसानों को अधिक आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स राज्य के ऊर्जा ढांचे के लिए जरूरी हैं, लेकिन साथ ही किसानों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मुआवज़ा नीति को समय-समय पर संशोधित किया गया है।
मंत्री ने विधानसभा में यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना को तभी आगे बढ़ाया जाएगा जब प्रभावित किसानों को उनकी भूमि के लिए उचित मुआवज़ा सुनिश्चित कर दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहनी चाहिए।
किसान संगठनों की ओर से लंबे समय से मुआवज़ा बढ़ाने की मांग की जा रही थी। नई नीति को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, विधानसभा में दिए गए इस बयान से यह स्पष्ट हुआ है कि महाराष्ट्र सरकार ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के हितों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रही है और मुआवज़ा प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बनाने की दिशा में काम कर रही है।





