महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में भारी राजकोषीय, राजस्व घाटे के साथ 547,450 करोड़ रुपये का बजट पेश

Rani Sahu
9 March 2023 1:31 PM GMT
महाराष्ट्र में भारी राजकोषीय, राजस्व घाटे के साथ 547,450 करोड़ रुपये का बजट पेश
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मुंबई,(आईएएनएस)| महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास वित्त विभाग भी है, उन्हेंने गुरुवार को भारी राजकोषीय और राजस्व घाटा दिखाते हुए वित्तवर्ष 2023-2024 के लिए 547,450 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बजट अनुमानों के अनुसार, राज्य ने 465,645 करोड़ रुपये के राजस्व व्यय पर 449,522 करोड़ रुपये की अनुमानित राजस्व प्राप्तियों के साथ 547,450 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है, जिसके परिणामस्वरूप 2022-2023 में राजस्व में 16,211 करोड़ रुपये की कमी हुई है, जो पहले 24,353 करोड़ रुपये था।
राज्य सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) का 1 प्रतिशत से कम राजस्व घाटा लगातार बना बना हुआ है, हालांकि राजकोषीय सुधारों में राज्य अग्रणी बना हुआ है।
राज्य सरकार राजकोषीय घाटे को एसजीडीपी के 3 प्रतिशत से कम रखने में भी सफल रही है और 2023-2024 के लिए राजकोषीय घाटा 95,500.8 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। 2022-2023 में राजकोषीय घाटा 89,598 करोड़ रुपये था।
फडणवीस ने कहा कि बजट पांच प्रमुख लक्ष्यों - 'पंचामृत' पर आधारित है, जिसमें किसानों, समावेशी विकास, बुनियादी ढांचे, रोजगार और पर्यावरण को शामिल किया गया है।
उन्होंने टिकाऊ खेती और समृद्ध किसानों के लिए 29,163 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। महिलाओं, बच्चों, आदिवासियों, बीसी/ओबीसी सहित समाज के सभी वर्गो के समावेशी विकास के लिए 43,036 करोड़ रुपये, पर्याप्त पूंजी निवेश के साथ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 53,058.55 करोड़ रुपये, युवाओं के लिए सक्षम, कुशल रोजगार सृजन के लिए 11,658 करोड़ रुपये और पर्यावरण के अनुकूल विकास के लिए 13,437 करोड़ रुपये।
फडणवीस ने कहा कि योजना व्यय के लिए बजट का परिव्यय 172,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति योजना के लिए 13,820 करोड़ रुपये और जनजातीय उप-योजना के लिए 12,655 करोड़ रुपये शामिल हैं, इसके अलावा विभिन्न समुदायों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई नए निगमों की घोषणा की गई है।
आरबीआई की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कर्ज का बोझ 31 मार्च, 2023 तक 6.8 लाख करोड़ रुपये था, जो तमिलनाडु (7.53 लाख करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (7.1 लाख करोड़ रुपये) से पीछे है।
--आईएएनएस
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