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महाराष्ट्र में BNS अमेंडमेंट बिल पास: डिजिटल क्राइम और पहचान उजागर करने पर सख्ती

Maharashtra महाराष्ट्र: विधानसभा ने भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। यह संशोधन पहले प्रस्तावित शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2020 के कुछ प्रमुख तत्वों को मौजूदा नए आपराधिक ढांचे में समाहित करता है। यह कदम भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद राज्य स्तर पर किए गए एक महत्वपूर्ण विधायी परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।
यह विधेयक हाल ही में विधानसभा के दोनों सदनों में पारित किया गया। शक्ति बिल 2020 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त सजा और तेज जांच व ट्रायल की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा नए आपराधिक कानून लागू किए जाने के बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। अब राज्य सरकार ने इसके कुछ प्रावधानों को नए संशोधन के माध्यम से शामिल किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संशोधन को “ऐतिहासिक कदम” बताया है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में अपराध के स्वरूप में भी बदलाव आया है, खासकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के कारण। ऐसे में कानूनों को सिर्फ पारंपरिक अपराधों तक सीमित न रखते हुए ऑनलाइन अपराधों को भी शामिल करना जरूरी हो गया है।
सरकार द्वारा गठित एक समीक्षा समिति ने पाया कि शक्ति बिल के कई प्रावधान पहले से ही भारतीय न्याय संहिता में मौजूद हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अतिरिक्त सुधार की आवश्यकता थी। इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन लाया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कानून की प्रभावशीलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। एडवोकेट जय वैद्य ने कहा कि यदि कानून सही तरीके से लागू किया जाए तो यह महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी साबित हो सकता है। वहीं एडवोकेट और एक्टिविस्ट आभा सिंह ने कहा कि शक्ति अधिनियम के प्रावधानों को BNS में शामिल करने से कानूनी कार्रवाई में निरंतरता आएगी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इसके दुरुपयोग की संभावना पर भी चिंता जताई है। मजलिस की निदेशक एडवोकेट ऑड्रे डीमेलो ने कहा कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि शक्ति एक्ट के सभी प्रावधान वापस लाए गए हैं। उनके अनुसार, यह संशोधन केवल कुछ सीमित बदलावों तक ही सीमित है।
नए संशोधन के तहत मुख्य रूप से दो बड़े बदलाव किए गए हैं। पहला, सेक्शन 75 (यौन उत्पीड़न) का विस्तार किया गया है, जिसमें अब ईमेल, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाले उत्पीड़न, निजी फोटो या वीडियो साझा करने की धमकी जैसे मामलों को भी शामिल किया गया है। इसे एक ही अपराध की श्रेणी में रखा गया है। दूसरा, सेक्शन 72 के तहत एसिड अटैक पीड़ितों की पहचान उजागर करने को अपराध घोषित किया गया है, जिससे उनकी गोपनीयता और सुरक्षा को अधिक मजबूत किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स की पहचान की सुरक्षा उन्हें गरिमा और सामाजिक सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देती है। वहीं डिजिटल अपराधों को शामिल करने से ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों पर सख्त कार्रवाई संभव होगी।
हालांकि, कुछ कानूनी जानकारों ने चेतावनी दी है कि व्यापक परिभाषाओं के कारण इन कानूनों के गलत इस्तेमाल की संभावना भी बनी रह सकती है, खासकर निजी विवादों और डिजिटल शिकायतों में। फिलहाल यह विधेयक राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है।





