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Maharashtra: लेपर्ड सफारी की योजना, तेंदुओं की बढ़ती संख्या पर सरकार का कदम

Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बढ़ती तेंदुआ (लेपर्ड) आबादी को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों में लेपर्ड सफारी शुरू करने की योजना पर विचार शुरू कर दिया है। यह जानकारी राज्य के वन मंत्री गणेश नाइक ने एक सार्वजनिक शिकायत निवारण बैठक के बाद दी। उन्होंने बताया कि पिछले सात से आठ वर्षों में राज्य में तेंदुओं की संख्या लगभग चार गुना तक बढ़ गई है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति भी कई क्षेत्रों में देखने को मिल रही है।
मंत्री के अनुसार, सबसे अधिक तेंदुओं की मौजूदगी पुणे जिले के कुछ हिस्सों जैसे जुन्नार, अंबेगांव और शिरुर में दर्ज की गई है। इसके अलावा अहिल्यानगर क्षेत्र में भी तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने और वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने नया कदम उठाने की योजना बनाई है।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 250 तेंदुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से प्रोटेक्टिव एनक्लोजर में रखा गया है। ये कदम उन क्षेत्रों में उठाए गए हैं जहां तेंदुओं के मानव बस्तियों के करीब आने की घटनाएं बढ़ी हैं।
गणेश नाइक ने बताया कि राज्य सरकार सभी जिलों में लेपर्ड सफारी विकसित करने के लिए जिलेवार योजना तैयार कर रही है। इसमें पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, नंदुरबार, धुले, जलगांव, नासिक, सांगली, सतारा और कोल्हापुर जैसे जिले शामिल हैं। इसके साथ ही मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्रों में भी इस योजना पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि विदर्भ क्षेत्र में अलग से टाइगर सफारी विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे राज्य में वन्यजीव पर्यटन को एक नई दिशा मिल सके। सरकार का मानना है कि इस तरह की पहल से न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
वन विभाग का कहना है कि बढ़ती तेंदुआ आबादी के कारण कई इलाकों में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ उनका संपर्क बढ़ रहा है, जिससे कभी-कभी संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में सुरक्षित सफारी और नियंत्रित वातावरण में इन जानवरों को संरक्षित करना एक व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है।सरकार की इस
योजना का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित सफारी परियोजनाओं पर आगे विस्तृत अध्ययन और योजना के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस कदम को राज्य में वन्यजीव प्रबंधन और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में महाराष्ट्र देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।





