महाराष्ट्र

महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के लिए ई-पेपर की अनिवार्यता हटाई

Kavita2
31 July 2026 4:16 PM IST
महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के लिए ई-पेपर की अनिवार्यता हटाई
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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को अपने उस फैसले में बदलाव कर दिया, जिसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर और मंत्रियों के लिए अखबारों और पत्रिकाओं का केवल ऑनलाइन ई-पेपर सब्सक्रिप्शन अनिवार्य किया गया था। सरकार ने अब यह व्यवस्था कर दी है कि मंत्री अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या फिजिकल यानी प्रिंट सब्सक्रिप्शन में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं।

जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) ने यह संशोधन उस आदेश के एक दिन बाद जारी किया, जिसमें कहा गया था कि 1 सितंबर से राज्य के मंत्रियों को अखबारों और पत्रिकाओं के लिए केवल डिजिटल माध्यम का उपयोग करना होगा। नए निर्देश के अनुसार, अब डिजिटल के साथ-साथ पारंपरिक प्रिंट संस्करण की सुविधा भी जारी रहेगी।

एक दिन में बदला फैसला

महाराष्ट्र सरकार का पहला आदेश सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। आदेश में कहा गया था कि मंत्रियों को अखबार और पत्रिकाओं के लिए ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन लेना होगा और इसका खर्च उन्हें खुद उठाना होगा।

इस फैसले का उद्देश्य सरकारी खर्च को कम करना और डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देना बताया गया था। हालांकि, आदेश जारी होने के अगले ही दिन सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए मंत्रियों को विकल्प देने का फैसला किया।

अब मंत्री अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार यह तय कर सकेंगे कि वे अखबारों और पत्रिकाओं को ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं या फिर उनकी भौतिक प्रतियां मंगवाना चाहते हैं।

डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश

सरकार की ओर से पहले जारी किए गए निर्देश को डिजिटल गवर्नेंस और कागज की खपत कम करने की दिशा में एक कदम माना गया था। प्रशासन में डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं।

ई-पेपर के इस्तेमाल से कागज की बचत, रिकॉर्ड को आसानी से सुरक्षित रखने और कहीं से भी समाचार पढ़ने की सुविधा मिलती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने मंत्रियों के लिए ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई थी।

हालांकि, नए संशोधन के बाद डिजिटल विकल्प जारी रहेगा, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं रखा गया है।

मंत्रियों को खुद उठाना होगा खर्च

सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अखबार और पत्रिकाओं के सब्सक्रिप्शन का खर्च मंत्रियों को स्वयं वहन करना होगा। पहले सरकारी स्तर पर मंत्रियों के कार्यालयों में कई अखबार और पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाती थीं।

नई व्यवस्था के तहत मंत्रियों को अपनी जरूरत के अनुसार सब्सक्रिप्शन लेना होगा। इसमें वे डिजिटल प्लेटफॉर्म या प्रिंट संस्करण का चुनाव कर सकते हैं।

प्रशासनिक खर्च कम करने की पहल

सरकार की इस पहल को प्रशासनिक खर्चों में कटौती के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में कागज की खपत कम करने और डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ाने पर पिछले कुछ वर्षों से जोर दिया जा रहा है।

हालांकि, समाचार पत्रों के प्रिंट संस्करण का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या अभी भी काफी है। कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी पारंपरिक अखबार पढ़ने की आदत रखते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अनिवार्यता हटाकर विकल्प देने का फैसला किया है।

फैसले पर उठे सवालों के बाद बदलाव

पहले आदेश के बाद यह सवाल उठे थे कि क्या सभी मंत्रियों के लिए डिजिटल माध्यम अनिवार्य करना व्यावहारिक होगा। कई लोगों का मानना था कि समाचार पढ़ने के तरीके व्यक्तिगत पसंद और कार्यशैली पर निर्भर करते हैं।

इसके बाद सरकार ने अपने फैसले की समीक्षा की और शुक्रवार को संशोधित निर्देश जारी कर दिए। अब नई व्यवस्था में डिजिटल और प्रिंट दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे।

आगे की व्यवस्था

GAD की ओर से जारी नए निर्देश के बाद मंत्रियों और उनके कार्यालयों को अपनी पसंद के अनुसार सब्सक्रिप्शन व्यवस्था तय करनी होगी। सरकार की ओर से डिजिटल माध्यमों को प्रोत्साहित करने का प्रयास जारी रहेगा, लेकिन इसे व्यक्तिगत सुविधा के साथ जोड़ा गया है।

महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला प्रशासन में डिजिटल बदलाव और व्यावहारिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब मंत्री अपनी कार्यशैली के अनुरूप अखबार और पत्रिकाओं का उपयोग कर सकेंगे।

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