महाराष्ट्र

मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार का 260 करोड़ का एक्शन प्लान मंजूर

Kavita2
27 May 2026 3:18 PM IST
मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार का 260 करोड़ का एक्शन प्लान मंजूर
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Maharashtra महाराष्ट्र: मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 260 करोड़ रुपये के व्यापक एक्शन प्लान को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और वन क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं को कम करना और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करना है।

यह निर्णय मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ़ की स्थायी समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता राज्य के वन मंत्री गणेश नाइक ने की। इस दौरान राज्य में वन्यजीवों के कारण हो रहे नुकसान, मानव जीवन पर खतरे और रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मंजूर किए गए इस प्लान के तहत राज्य के 1,000 गांवों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वाइल्डलाइफ अलर्ट सिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह सिस्टम जंगलों से बाहर निकलने वाले जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखेगा और समय रहते स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों को अलर्ट भेजेगा।

इसके अलावा, योजना में आधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है, जहां से पूरे सिस्टम की निगरानी की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) को तैनात किया जाएगा, जो घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करेगी।

सरकार की इस योजना में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटरों को भी मजबूत करने की बात कही गई है, ताकि घायल या भटके हुए जानवरों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू और उपचार दिया जा सके। इससे मानव और जानवर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, बदलते पर्यावरण और जंगलों के सिकुड़ते दायरे के कारण वन्यजीव अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस योजना का उद्देश्य तकनीक के उपयोग से ऐसी घटनाओं को कम करना और समय रहते रोकथाम करना है।

न विभाग का मानना है कि AI आधारित सिस्टम और मजबूत निगरानी ढांचे से न केवल नुकसान कम होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा की भावना भी बढ़ेगी।

फिलहाल इस योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया जल्द शुरू किए जाने की उम्मीद है, ताकि राज्य के संवेदनशील इलाकों में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

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