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Maharashtra : देवस्थान इनामी जमीन खत्म करने के फैसले पर ड्राफ्ट कानून जारी

Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मंदिरों की इनामी जमीन प्रणाली को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले के लागू होने के बाद रीडेवलपमेंट और व्यावसायिक उपयोग के लिए बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध होने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान के अनुसार, राज्य में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि देवस्थान इनामी जमीन के रूप में वर्गीकृत है, जिसमें से अधिकांश पर निजी कब्जा बताया जाता है।
इस प्रस्ताव के तहत भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने एक नया ड्राफ्ट कानून तैयार किया है, जिसका नाम “महाराष्ट्र देवस्थान इनाम खत्म करने का एक्ट, 2026” रखा गया है। इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक रूप से जारी कर दिया गया है और सरकार ने इस पर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, नागरिक इस प्रस्तावित कानून पर अपनी राय एक महीने के भीतर, यानी 5 जून तक भेज सकते हैं। इसके बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक संशोधनों के बाद अंतिम कानून तैयार किया जाएगा।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य में लंबे समय से चली आ रही देवस्थान इनामी जमीन व्यवस्था में सुधार करना बताया जा रहा है। इन जमीनों का एक बड़ा हिस्सा वर्षों से उपयोग में नहीं है या फिर निजी कब्जे में बताया जा रहा है, जिससे इसके सही उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
सरकार का मानना है कि इस कदम से भूमि उपयोग को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा। साथ ही, शहरी विकास, रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और औद्योगिक विस्तार के लिए जमीन की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
हालांकि, इस फैसले को लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा भी शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे धार्मिक और पारंपरिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। इस मुद्दे पर आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह कानून लागू होता है, तो राज्य के कई क्षेत्रों में भूमि उपयोग की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खासकर शहरी इलाकों में रीडेवलपमेंट परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल सरकार ने इसे ड्राफ्ट चरण में रखा है और अंतिम निर्णय जनता की प्रतिक्रिया और सुझावों के बाद लिया जाएगा। 5 जून तक मिलने वाले फीडबैक इस कानून के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





