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Maharashtra : परियोजनाओं की समयसीमा तय, फडणवीस ने देरी बर्दाश्त न करने का आदेश

Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने राज्य की सभी बुनियादी ढांचा एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रमुख विकास परियोजनाएं अधिकतम तीन से साढ़े तीन वर्षों के भीतर पूरी की जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परियोजनाओं में किसी भी तरह की देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी और ठेकेदारों की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
गुरुवार को सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित मुख्यमंत्री इंफ्रास्ट्रक्चर वॉर रूम की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए फडणवीस ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति का विस्तार से आकलन किया। बैठक में राज्य भर में चल रही सड़क, परिवहन, शहरी विकास और अन्य प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करना महाराष्ट्र की आर्थिक वृद्धि के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन सभी बाधाओं की पहचान करें और उन्हें तुरंत दूर करें, जिनकी वजह से काम की गति प्रभावित होती है।
फडणवीस ने बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा, “यदि ठेकेदार परियोजना को पूरा करने में देरी करते हैं, तो इससे देश और राज्य दोनों को नुकसान होता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि परियोजनाओं की निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए ताकि हर चरण की प्रगति पर नियमित रूप से नजर रखी जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे समयबद्ध लक्ष्य तय करें और हर परियोजना की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करें।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि कई परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और तकनीकी बाधाओं के कारण समय से पीछे चल रही हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि इन मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए ताकि निर्माण कार्य में कोई रुकावट न आए।
फडणवीस ने कहा कि राज्य में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास को देखते हुए मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देरी न केवल लागत बढ़ाती है बल्कि विकास की गति को भी प्रभावित करती है।
राज्य सरकार का मानना है कि समय पर परियोजनाओं का पूरा होना निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है।
इस बैठक के बाद यह स्पष्ट संदेश गया है कि महाराष्ट्र में अब बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं होगी और सभी एजेंसियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा करना अनिवार्य होगा।





