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महाराष्ट्र बना पहला राज्य, भारतFS इंटीग्रेशन से आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई ताकत

Maharashtra महाराष्ट्र: आपदा प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महाराष्ट्र ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने स्वदेशी एडवांस्ड वेदर फोरकास्टिंग मॉडल ‘भारत फोरकास्ट सिस्टम (BharatFS)’ को अपनी आपदा प्रबंधन प्रणाली में इंटीग्रेट किया है। इस पहल से राज्य में सिचुएशनल अवेयरनेस और जियोस्पेशियल डिसीजन-मेकिंग को नई मजबूती मिलेगी।
इस महत्वपूर्ण कदम के तहत महाराष्ट्र स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) ने पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी (IITM) के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य राज्य की खराब मौसम से जुड़ी आपदाओं के प्रति तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।
अधिकारियों के अनुसार, यह सहयोग एडवांस्ड मौसम पूर्वानुमान तकनीक को सीधे सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़ता है, जिससे आपदा के समय तेज और सटीक कार्रवाई संभव हो सकेगी। इस प्रणाली के माध्यम से मौसम संबंधी खतरों की पहले से पहचान कर समय पर अलर्ट जारी किए जा सकेंगे।
भारत फोरकास्ट सिस्टम (BharatFS), जिसे भारत सरकार के इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के मिशन मौसम के तहत विकसित किया गया है, एक स्वदेशी अत्याधुनिक फोरकास्टिंग टूल है। यह प्रणाली मौसम के बदलावों का अधिक सटीक अनुमान लगाने में सक्षम मानी जा रही है।
अब इस तकनीक को महाराष्ट्र के स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) में जियोस्पेशियल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (GeoDSS) के माध्यम से उपयोग में लाया जाएगा। इससे आपदा प्रबंधन अधिकारियों को रियल-टाइम डेटा और मैप आधारित विश्लेषण उपलब्ध होगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया और तेज व प्रभावी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस इंटीग्रेशन से बाढ़, भारी बारिश, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में काफी मदद मिलेगी। समय रहते सही जानकारी मिलने से जान-माल के नुकसान को कम करने में सहायता मिलेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक तकनीकी क्रांति की तरह है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। महाराष्ट्र सरकार ने इसे “प्रोएक्टिव डिजास्टर मैनेजमेंट” की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली के जरिए मौसम से जुड़े जोखिमों की निगरानी लगातार की जाएगी और आवश्यकतानुसार स्थानीय प्रशासन को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा। इससे राहत और बचाव कार्यों की गति भी बढ़ेगी।
इस साझेदारी को केंद्र और राज्य के बीच तकनीकी सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जो भारत में आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक और डेटा-आधारित बनाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है।





