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Maharashtra : ऐतिहासिक बावड़ियों के संरक्षण के लिए बड़ा कदम, सरकार ने तैयार किया विस्तृत प्लान

Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सरकार राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल बावड़ियों को संरक्षित करने के लिए एक बड़े और व्यवस्थित प्लान पर काम कर रही है। इस योजना के तहत स्थानीय प्रशासन, हेरिटेज विशेषज्ञों और संबंधित विभागों को शामिल कर संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और पुनर्निर्माण जैसे कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यह निर्देश महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने राज्य सरकार की बावड़ी संरक्षण समिति की बैठक के दौरान जारी किया। बैठक में राज्य भर में मौजूद ऐतिहासिक बावड़ियों की स्थिति और उनके संरक्षण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि महाराष्ट्र की बावड़ियां न केवल जल प्रबंधन की पारंपरिक प्रणाली का हिस्सा हैं, बल्कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ऐसे में इन संरचनाओं को बचाना सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि बावड़ियों के संरक्षण के लिए एक समग्र रणनीति अपनाई जाएगी, जिसमें स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका के साथ-साथ हेरिटेज विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता भी ली जाएगी। इसके तहत अतिक्रमण हटाने, संरचनाओं की मरम्मत और उनके पुनरुद्धार जैसे कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
मंत्री ने पुरातत्व निदेशालय को निर्देश दिया कि राज्य की सभी ऐतिहासिक बावड़ियों की पहचान कर उनका विस्तृत सर्वेक्षण किया जाए और उनके संरक्षण के लिए एक डिटेल्ड एक्शन प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार का मानना है कि लंबे समय से उपेक्षा के कारण कई बावड़ियां जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं और कुछ स्थानों पर अतिक्रमण भी हो गया है। ऐसे में समय रहते संरक्षण कार्य शुरू करना आवश्यक है, ताकि इन धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
योजना के तहत न केवल संरचनाओं की मरम्मत की जाएगी, बल्कि इन बावड़ियों को सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो राज्य की कई अनमोल धरोहरें पुनर्जीवित हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार का यह कदम ऐतिहासिक बावड़ियों के संरक्षण और पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।





