महाराष्ट्र

Maharashtra : साइबर जांच को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

Kavita2
8 May 2026 10:12 AM IST
Maharashtra : साइबर जांच को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
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Maharashtra महाराष्ट्र: डिजिटल अपराधों की बढ़ती चुनौतियों के बीच राज्य सरकार ने साइबर पुलिस स्टेशनों की जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने कॉल डेटा OSINT और एनालिसिस टूल्स खरीदने के लिए 9.44 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस कदम से साइबर अपराधों की जांच और अधिक तेज़, सटीक और तकनीकी रूप से उन्नत होने की उम्मीद है।

गृह विभाग के अनुसार, इन आधुनिक तकनीकों के जरिए साइबर पुलिस स्टेशनों को इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR) और डिवाइस इंटेलिजेंस डेटा जैसी उन्नत कम्युनिकेशन तकनीकों से लैस किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल जांच प्रणाली को मजबूत बनाना और अपराधों की गहराई से जांच करना है।

सरकारी प्रस्ताव में बताया गया है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इसके अलावा वॉयस कॉलिंग एप्लीकेशन (VoIP) लॉग का विश्लेषण, टावर डंप डेटा की जांच और लोकेशन-बेस्ड सर्विसेज से जुड़ी जानकारी हासिल करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

अधिकारियों का कहना है कि आज के समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और अपराधी नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के पास भी उन्नत तकनीकी उपकरण होना जरूरी हो गया है, ताकि अपराधियों तक तेजी और सटीकता से पहुंचा जा सके।

इस पहल से न केवल साइबर अपराधों की जांच में सुधार होगा, बल्कि डिजिटल सबूतों को इकट्ठा करने और उनका विश्लेषण करने की प्रक्रिया भी आसान होगी। इससे पुलिस को केस सॉल्व करने में अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी और जांच में लगने वाला समय भी कम होगा।

गृह विभाग ने कहा कि इस तकनीकी अपग्रेड से साइबर पुलिस स्टेशनों की क्षमता में बड़ा सुधार होगा और वे आधुनिक डिजिटल अपराधों से बेहतर तरीके से निपट सकेंगे। यह कदम राज्य को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि OSINT (ओपन सोर्स इंटेलिजेंस) और कॉल डेटा एनालिटिक्स जैसे टूल्स के उपयोग से पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में मदद मिलेगी और नेटवर्क आधारित अपराधों का जल्द खुलासा संभव होगा।

सरकार का यह निर्णय डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाने और कानून व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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