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Maharashtra में कन्नड़ मीडियम टीचर्स की भर्ती में भाषा की चुनौती

Maharashtra महाराष्ट्र: कन्नड़ मीडियम में D.Ed या B.Ed करने वाले अभ्यर्थियों को राज्य में कन्नड़ टीचर की पोस्ट के लिए एलिजिबिलिटी टेस्ट देते समय गंभीर भाषा संबंधी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ़ एग्जामिनेशन (MSCE) द्वारा आयोजित टीचर रिक्रूटमेंट एग्जाम के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में अभ्यर्थियों को ‘कन्नड़’ मीडियम का विकल्प दिया जाता है। लेकिन परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र केवल मराठी या अंग्रेज़ी में उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे कन्नड़ मीडियम के कई योग्य अभ्यर्थी परीक्षा में असफल हो जाते हैं।
कन्नड़ भाषा के समर्थक संगठन आरोप लगा रहे हैं कि यह स्थिति राज्य में कन्नड़-मीडियम टीचिंग के लिए भी गंभीर चुनौती पेश कर रही है। उनका कहना है कि अगर योग्य उम्मीदवारों को उनकी मातृभाषा में प्रश्नपत्र नहीं मिलता, तो कई टीचर्स भर्ती प्रक्रिया में पिछड़ जाते हैं, जिससे शिक्षकों की कमी पैदा होती है। यह मुद्दा केवल भर्ती प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे कक्षा में पढ़ाई और भाषा के प्रचार-प्रसार पर भी असर पड़ता है।
यह विवाद हाल ही में तब फिर से सामने आया, जब MSCE ने 26 जून को होने वाली रिक्रूटमेंट एग्जाम के लिए नोटिफिकेशन जारी किया। इस परीक्षा में कुल 135 कन्नड़ टीचरों की भर्ती की योजना है। हालांकि आवेदन करते समय कैंडिडेट्स को कन्नड़ मीडियम का विकल्प दिया गया है, लेकिन परीक्षा में कन्नड़ में प्रश्नपत्र की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई है। इससे अभ्यर्थियों में असमंजस और चिंता बढ़ गई है।
Maharashtra में कन्नड़ मीडियम टीचर्स की भर्ती में भाषा की चुनौतीसंगठनों ने राज्य सरकार और परीक्षा बोर्ड से अपील की है कि परीक्षा में कन्नड़ मीडियम के प्रश्नपत्र की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यह न केवल अभ्यर्थियों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा, बल्कि राज्य में भाषाई विविधता बनाए रखने और शिक्षा के स्तर को सुधारने में भी मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कन्नड़ मीडियम अभ्यर्थियों को शामिल करना राज्य में भाषाई समानता और शिक्षा के अधिकार के लिए महत्वपूर्ण है। अगर योग्य शिक्षक अपनी मातृभाषा में परीक्षा न दे सकें, तो इससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से कन्नड़-मीडियम टीचरों की कमी पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
MSCE की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कहा है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा और कन्नड़-मीडियम शिक्षकों की कमी और बढ़ेगी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा फॉर्म में विकल्प उपलब्ध कराने का मतलब यह है कि उन्हें उसी भाषा में परीक्षा देने का अधिकार होना चाहिए। इसके बिना भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं मानी जा सकती। कन्नड़ समर्थक संगठन और अभ्यर्थी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जल्द से जल्द कन्नड़ मीडियम के प्रश्नपत्र की व्यवस्था की जाए ताकि योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।





