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गिरगांव चौपाटी पहुंचे लालबागचा राजा, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब

मुंबई। मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के गणेश विसर्जन 2026 की यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। शनिवार, 26 सितंबर की सुबह लालबागचा राजा का भव्य रथ गिरगांव चौपाटी पहुंचा। रातभर चली करीब आठ किलोमीटर लंबी विसर्जन शोभायात्रा के बाद सुबह लगभग 8 बजे बप्पा के चौपाटी पहुंचते ही समुद्र किनारे मौजूद हजारों श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। विसर्जन से पहले लालबागचा राजा के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त चौपाटी पर मौजूद रहे।
लालबाग से शुरू हुई विसर्जन यात्रा सेंट्रल और साउथ मुंबई के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए गिरगांव चौपाटी पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालु लालबागचा राजा के दर्शन के लिए सड़कों के दोनों ओर खड़े रहे। गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा। कहीं फूलों की वर्षा की गई तो कहीं श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बप्पा को विदाई दी।
#WATCH | Maharashtra: The iconic Lalbaugcha Raja Ganpati idol reaches Girgaum Chowpatty in Mumbai for immersion. Reliance Industries Executive Director and Vantara Founder Anant Ambani is also participating in this idol immersion. pic.twitter.com/nqZwcftuJL
— ANI (@ANI) September 26, 2026
लालबागचा राजा मुंबई के सबसे प्रसिद्ध गणेश मंडलों में से एक है। गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। उत्सव के अंतिम चरण में निकलने वाली विसर्जन यात्रा भी मुंबई के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल होती है। इस यात्रा के दौरान लालबाग से गिरगांव चौपाटी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
शनिवार सुबह जब लालबागचा राजा का रथ गिरगांव चौपाटी के पास पहुंचा तो वहां पहले से ही भक्तों की भारी भीड़ मौजूद थी। समुद्र किनारे लोग बप्पा की एक झलक पाने और विसर्जन से पहले अंतिम दर्शन करने के लिए इंतजार कर रहे थे। जैसे ही प्रतिमा चौपाटी पहुंची, जयकारों की आवाज तेज हो गई।
रातभर चली शोभायात्रा के दौरान मुंबई का अलग ही नजारा देखने को मिला। विशाल प्रतिमा को लेकर आगे बढ़ रहे रथ के आसपास बड़ी संख्या में मंडल के कार्यकर्ता और श्रद्धालु मौजूद रहे। कई भक्त पूरी रात यात्रा के साथ चलते रहे। यात्रा के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने बप्पा का स्वागत किया।
लालबागचा राजा की विसर्जन यात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि मुंबई की गणेशोत्सव परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। हर साल विसर्जन के समय बड़ी संख्या में लोग इस यात्रा में शामिल होते हैं। मुंबई के अलग-अलग हिस्सों से लोग लालबागचा राजा को विदाई देने के लिए पहुंचते हैं।
इस बार भी विसर्जन यात्रा को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। हजारों लोगों की मौजूदगी को देखते हुए यात्रा मार्ग और गिरगांव चौपाटी के आसपास पुलिस तथा प्रशासन की टीमें तैनात रहीं। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
गिरगांव चौपाटी मुंबई में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के प्रमुख स्थानों में से एक है। गणेशोत्सव के अंतिम चरण में यहां मुंबई के विभिन्न मंडलों की बड़ी और छोटी प्रतिमाएं विसर्जन के लिए पहुंचती हैं। इस दौरान चौपाटी और आसपास के मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है।
लालबागचा राजा के चौपाटी पहुंचने के बाद विसर्जन की तैयारियां शुरू हो गईं। विशाल प्रतिमा होने के कारण विसर्जन प्रक्रिया में विशेष व्यवस्थाओं की जरूरत होती है। मंडल के कार्यकर्ताओं और संबंधित एजेंसियों की मौजूदगी में प्रतिमा को समुद्र में विसर्जित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
बप्पा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं के बीच उत्साह के साथ भावुक माहौल भी दिखाई दिया। कई भक्त हाथ जोड़कर प्रार्थना करते नजर आए। गणेशोत्सव के दिनों में लगातार दर्शन और पूजा के बाद विसर्जन का समय श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक होता है। लोग अगले वर्ष फिर से बप्पा के आगमन की कामना के साथ उन्हें विदाई देते हैं।
लालबागचा राजा के दर्शन के लिए गणेशोत्सव के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग मुंबई पहुंचते हैं। आम श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां भी यहां दर्शन के लिए आती हैं। यही वजह है कि लालबागचा राजा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक हर गतिविधि पर लोगों की विशेष नजर रहती है।
रातभर चली करीब आठ किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान सेंट्रल और साउथ मुंबई के कई हिस्सों में भक्तों की भीड़ रही। प्रतिमा जैसे-जैसे गिरगांव चौपाटी की ओर बढ़ी, यात्रा में शामिल लोगों की संख्या भी बढ़ती गई। सुबह तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु समुद्र किनारे पहुंच चुके थे।
विसर्जन के दौरान सुरक्षा के साथ समुद्र तट पर व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। बड़ी संख्या में लोगों के पानी के पास पहुंचने के कारण बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की जाती है। श्रद्धालुओं से निर्धारित स्थानों पर रहने और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील भी की जाती है।
मुंबई में गणेशोत्सव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुका है। गणेशोत्सव के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में हजारों गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और कई दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद उनका विसर्जन किया जाता है।
इन सभी आयोजनों के बीच लालबागचा राजा का विशेष स्थान है। इसकी विसर्जन यात्रा देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। बप्पा की विदाई के समय “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” के जयकारे लगाते हुए भक्त अगले वर्ष जल्द लौटने की प्रार्थना करते हैं।
26 सितंबर की सुबह करीब आठ बजे गिरगांव चौपाटी पहुंचे लालबागचा राजा के अंतिम दर्शन के लिए समुद्र किनारे हजारों लोगों का जमावड़ा रहा। रातभर चली लंबी शोभायात्रा के बाद अब विसर्जन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बप्पा को विदाई देने के लिए जुटे श्रद्धालुओं के जयकारों और भावुक माहौल के बीच मुंबई का गणेशोत्सव अपने सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में पहुंच गया है।





