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Maharashtra महाराष्ट्र: छत्रपति संभाजीनगर जिले में मानसून की देरी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। समय पर बारिश नहीं होने के कारण जिले में लगभग 7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर खरीफ सीजन की बुआई प्रभावित हुई है। किसान अभी भी खेतों में बुआई शुरू करने के लिए पर्याप्त मिट्टी की नमी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में कृषि गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं।
किसानों के अनुसार, मृग नक्षत्र समाप्त हुए छह दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक अपेक्षित स्तर की बारिश नहीं हुई है। इस कारण खेतों में बुआई की तैयारी तो हो रही है, लेकिन वास्तविक काम शुरू नहीं हो पा रहा है। किसानों का कहना है कि जब तक जिले में अच्छी और लगातार बारिश नहीं होती, तब तक बुआई शुरू करना संभव नहीं है।
मानसून की इस देरी का सीधा असर कृषि कार्यों पर पड़ रहा है। खेतों में ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों की गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं। किसान वर्ग इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि बारिश में और देरी हुई तो खरीफ फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाएगी।
इस स्थिति का असर ग्रामीण इलाकों के दैनिक जीवन पर भी देखने को मिल रहा है। भीषण गर्मी और उमस के कारण लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। पानी की उपलब्धता और तापमान में वृद्धि ने आम जनजीवन को भी प्रभावित किया है।
किसानों का कहना है कि वे हर साल मानसून पर निर्भर रहते हैं, लेकिन इस बार बारिश की अनिश्चितता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। कई किसानों ने बताया कि वे खेत तैयार कर चुके हैं, लेकिन नमी न होने के कारण बीज नहीं बो पा रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष की स्थिति इससे बिल्कुल अलग थी। मई 2025 में जिले में तेज तूफान के साथ भारी बारिश दर्ज की गई थी, जिसके बाद 15 दिनों के भीतर 84 राजस्व मंडलों में बेमौसम बारिश हुई थी। उस समय खेतों में पानी अधिक होने के कारण अलग तरह की समस्याएं सामने आई थीं, जबकि इस वर्ष बारिश की कमी चुनौती बन गई है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर नजर रखी जा रही है और बारिश के बाद बुआई कार्य तेजी से शुरू हो सकता है। फिलहाल विभाग किसानों को मौसम के अनुसार ही बुआई करने की सलाह दे रहा है।
कुल मिलाकर, मानसून की देरी ने छत्रपति संभाजीनगर जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों को प्रभावित किया है और किसान बेहतर बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर देख रहे हैं।





