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Kathmandu : भारतीय पर्वतारोही उमेश ज़िरपे की शेरपा समुदाय पर लिखी पुस्तक नेपाली में जारी

Mumbai मुंबई: भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक और पर्वतारोहण संबंधों को दर्शाने वाले एक महत्वपूर्ण आयोजन के तहत अनुभवी भारतीय पर्वतारोही Umesh Zirpe की शेरपा समुदाय पर आधारित पुस्तक का नेपाली संस्करण काठमांडू में लॉन्च किया गया। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और पर्वतीय सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।
यह पुस्तक विशेष रूप से शेरपा समुदाय के योगदान और हिमालयी अभियानों में उनकी भूमिका को केंद्र में रखती है। काठमांडू में हुए इस लॉन्च ने न केवल साहित्यिक क्षेत्र में एक नई उपलब्धि जोड़ी है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी उजागर किया है।
कार्यक्रम के दौरान यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि वैश्विक पर्वतारोहण में शेरपा समुदाय की भूमिका को अक्सर कम आंका जाता है, जबकि वास्तविकता में वे इन अभियानों की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में गाइडेंस, रसद प्रबंधन, सुरक्षा सहायता और रेस्क्यू जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी विशेषज्ञता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
हिमालयी अभियानों में जहां पर्वतारोही अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, वहीं शेरपा समुदाय की मेहनत और जोखिम भरी भूमिका अक्सर पीछे रह जाती है। इस पुस्तक के माध्यम से उनकी जीवनशैली, संघर्ष और योगदान को विस्तार से सामने लाने का प्रयास किया गया है।
काठमांडू में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में साहित्य, पर्वतारोहण और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की पुस्तकों से न केवल शेरपा समुदाय के बारे में जागरूकता बढ़ती है, बल्कि नई पीढ़ी को हिमालयी संस्कृति और पर्वतारोहण की वास्तविकताओं को समझने में भी मदद मिलती है।
भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं, और यह पुस्तक उस रिश्ते को और मजबूत करने का एक प्रयास मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच हिमालयी क्षेत्र साझा होने के कारण पर्वतारोहण गतिविधियां भी एक साझा विरासत के रूप में देखी जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के साहित्यिक प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शेरपा समुदाय के योगदान को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, यह पर्वतारोहण के इतिहास को अधिक संतुलित और वास्तविक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में मदद करता है।
पुस्तक के नेपाली संस्करण के लॉन्च को भारत-नेपाल सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे और प्रयासों को प्रेरित कर सकता है।





