महाराष्ट्र

कांची शंकराचार्य ने BSE में धर्म और नैतिक नेतृत्व पर विचार साझा किए

Kavita2
8 April 2026 10:22 AM IST
कांची शंकराचार्य ने BSE में धर्म और नैतिक नेतृत्व पर विचार साझा किए
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Maharashtra महाराष्ट्र: कांची के शंकराचार्य, जगद्गुरु शंकर विजयेंद्र सरस्वती, जो मुंबई में 10 दिन के दौरे पर हैं, ने मंगलवार शाम बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में आयोजित “धर्मम चर 2026” कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में देश के विकसित भारत बनने की दिशा में नैतिकता, शासन और जिम्मेदार नेतृत्व की भूमिका पर चर्चा हुई।

इवेंट का आयोजन श्री प्रत्यक्षा चैरिटेबल ट्रस्ट ने किया, जो कांची कामकोटि पीठम की देखरेख में काम करता है। इसमें भारत के कॉर्पोरेट, फाइनेंशियल और पॉलिसी क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ और नेता शामिल हुए। उद्देश्य 2047 तक स्वतंत्र भारत के सौ वर्ष पूरे होने तक देश की प्रगति में धर्म की भूमिका को उजागर करना था।

शंकराचार्य ने कहा कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, जहाँ कंपनी के शेयर ट्रेड होते हैं, विचारों के आदान-प्रदान का मंच भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि नैतिक नेतृत्व और जिम्मेदार प्रबंधन ही एक विकसित समाज की नींव रख सकते हैं। उन्होंने कांची कामकोटि पीठम की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन देशभर में मंदिरों के नवीनीकरण और नए मंदिरों के निर्माण में मदद करता है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि संगठन का मुख्यालय तमिलनाडु में है, लेकिन इसका दृष्टिकोण राष्ट्रीय है।

धर्म पर अपने विचार साझा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि स्वतंत्रता का असली अर्थ तभी पूरा होगा जब धर्म की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित होगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत वर्तमान में स्थिरता का अनुभव कर रहा है और इस स्थिरता का उपयोग देश की इंडस्ट्री और सेवा क्षेत्र के विकास के लिए किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि नैतिक और जिम्मेदार नेतृत्व देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बना सकता है।

कार्यक्रम में शामिल नेताओं और विशेषज्ञों ने भी शंकराचार्य की बातों का समर्थन किया और यह माना कि नैतिकता और धर्म केवल धार्मिक पहलू नहीं हैं, बल्कि वे देश की स्थिरता और विकास के आधार भी हैं। कार्यक्रम में विभिन्न कॉर्पोरेट हेड्स और पॉलिसी मेकर्स ने विचार साझा किए कि कैसे नैतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया उद्योग और वित्तीय नीति में भी लागू की जा सकती है।

शंकराचार्य ने कहा कि शिक्षा और नेतृत्व में धर्म की समझ विकसित करने से युवा वर्ग में नैतिकता और जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी। इसके अलावा, उन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर धर्म और नैतिक मूल्यों की भूमिका को मजबूत करने की बात कही।

इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि धर्मम चर 2026 जैसे कार्यक्रम समाज में नैतिकता और जिम्मेदार नेतृत्व के महत्व को उजागर करने का प्रयास हैं। शंकराचार्य की उपस्थिति और उनके विचारों ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा और दिशा दी।

कुल मिलाकर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में यह कार्यक्रम सिर्फ़ आर्थिक लेन-देन का मंच नहीं बल्कि नैतिक और जिम्मेदार नेतृत्व पर विचार साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर बन गया। शंकराचार्य ने जोर दिया कि विकास, उद्योग और सेवा क्षेत्र में स्थिरता और नैतिकता का संतुलन होना ज़रूरी है।

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