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JNPA ने फंसे हुए एक्सपोर्ट कंटेनरों पर राहत की अवधि बढ़ाई

Maharashtra महाराष्ट्र: जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) ने मिडिल ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल दिक्कतों से प्रभावित एक्सपोर्टर्स को राहत देने के लिए फंसे हुए एक्सपोर्ट कंटेनरों के स्टोरेज, ड्वेल टाइम और रीफर प्लग-इन चार्ज पर छूट की अवधि बढ़ा दी है। यह कदम एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट (EXIM) कम्युनिटी पर वित्तीय और संचालन संबंधी बोझ कम करने के मकसद से उठाया गया है।
3 अप्रैल को जारी ट्रेड नोटिस के अनुसार, यह एक्सटेंशन 14 मार्च की पिछली डेडलाइन के बाद 5 अप्रैल की आधी रात तक लागू रहेगा। इससे पहले JNPA ने 10 मार्च के ट्रेड नोटिस में इस राहत की घोषणा की थी। अब यह राहत उन कंटेनरों पर भी लागू होगी जो 28 फरवरी से पोर्ट टर्मिनलों के अंदर पड़े हुए थे या 8 मार्च सुबह 7 बजे तक गेट इन हुए थे।
इस राहत के तहत ग्राउंड रेंट या ड्वेल टाइम चार्ज पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट भेजे जाने वाले एक्सपोर्ट कंटेनरों के रीफर प्लग-इन चार्ज पर 80 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इससे पोर्ट पर पड़े कंटेनरों पर एक्सपोर्टर्स का भारी वित्तीय बोझ कम होगा और व्यापार की प्रक्रियाओं में सुगमता आएगी।
JNPA ने स्पष्ट किया कि पिछले नोटिस में दिए गए सभी नियम और शर्तें अब भी वैसी ही लागू रहेंगी। इसका मतलब है कि एक्सटेंशन केवल शुल्क और छूट की अवधि तक सीमित है, अन्य नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
यह कदम विशेष रूप से उन एक्सपोर्टर्स के लिए महत्वपूर्ण है जो मिडिल ईस्ट की ओर सामान भेजते हैं और हाल की जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों के कारण माल समय पर नहीं भेज पाए थे। पोर्ट अथॉरिटी का उद्देश्य व्यापारियों को राहत प्रदान करना और उनके संचालन को आसान बनाना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की राहत नीति से न केवल व्यापारियों का वित्तीय बोझ कम होगा, बल्कि लंबित कंटेनरों के कारण पोर्ट की कार्यक्षमता पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सकेगा। इससे पोर्ट टर्मिनल पर जगह की कमी और लॉजिस्टिक चुनौतियों में भी सुधार होगा।
JNPA ने यह भी कहा कि यदि व्यापारियों को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होगी, तो पोर्ट प्रशासन इस पर विचार करेगा। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन EXIM कम्युनिटी के साथ मिलकर समस्याओं का समाधान निकालने में सक्रिय है।
इस प्रकार, JNPA का यह कदम मुंबई पोर्ट और मिडिल ईस्ट एक्सपोर्टर्स के लिए राहत और सहयोग का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इससे व्यापारिक लेन-देन में सहजता आएगी और लंबित कंटेनरों की समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी।





