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Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के जलगांव जिले में सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर की खराब स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। हाल ही में की गई जांच में यह पाया गया कि जिले के 131 जिला परिषद स्कूलों के कुल 356 क्लासरूम बेहद जर्जर हालत में हैं, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खासकर मानसून के मौसम को देखते हुए यह स्थिति और भी चिंताजनक मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, कई स्कूल भवनों की छतें लगातार टपक रही हैं, जबकि कई जगहों पर टिन की चादरें पूरी तरह जंग खा चुकी हैं। इसके अलावा कई भवनों की दीवारें कमजोर हो चुकी हैं, जिससे किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इन परिस्थितियों में छात्र मजबूरी में असुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई स्कूलों में पुरानी टाइल वाली छतों का उपयोग अब भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी बारिश के दौरान इन इमारतों के कुछ हिस्से गिरने का खतरा बना रहता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। मानसून के करीब आने के साथ यह जोखिम और अधिक बढ़ गया है।
इस स्थिति ने पिछले कुछ वर्षों में स्कूलों के रखरखाव और मरम्मत कार्य में कथित लापरवाही को भी उजागर किया है। स्थानीय स्तर पर समय-समय पर मरम्मत कार्य न होने के कारण कई भवन खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में संसाधनों की कमी भी एक प्रमुख कारण बताई जा रही है।
जांच के दौरान केवल क्लासरूम ही नहीं, बल्कि स्कूल परिसरों की अन्य सुविधाओं की स्थिति भी सामने लाई जा रही है। इनमें टॉयलेट, किचन, बिजली व्यवस्था, स्कूल गेट और बाउंड्री वॉल की स्थिति शामिल है। कई स्थानों पर इन सुविधाओं की हालत भी बेहद खराब बताई गई है, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और जिन स्कूलों की स्थिति गंभीर है, वहां तत्काल मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और जल्द से जल्द सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए और सरकार को प्राथमिकता के आधार पर इन स्कूलों की मरम्मत करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो मानसून के दौरान इन जर्जर भवनों में बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी है।





