महाराष्ट्र

सूखा इलाकों में रोजगार का निर्देश

Kavita2
6 Oct 2026 10:35 AM IST
सूखा इलाकों में रोजगार का निर्देश
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मुंबई। महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति के बीच राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर बढ़ा दिया है। रोजगार गारंटी योजना मंत्री भरत गोगावले ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी VB-G RAM G, के तहत काम मांगने वाले पात्र लोगों को विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए विभाग को अलग से विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा गया है।

सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रोजगार गारंटी योजना और VB-G RAM G के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए गोगावले ने कहा कि मौजूदा हालात में केवल अस्थायी रोजगार देना पर्याप्त नहीं होगा। जल संरक्षण, कृषि से जुड़े काम और ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण को प्राथमिकता देकर ऐसी योजनाएं चलाई जानी चाहिए, जिनसे लोगों को मजदूरी भी मिले और गांवों को लंबे समय तक फायदा भी हो।

केंद्र सरकार का VB-G RAM G कानून 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन तक अकुशल मजदूरी वाले रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है। केंद्र सरकार के मुताबिक महाराष्ट्र के लिए योजना के तहत 4,420.32 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन किया गया था।

गोगावले ने अधिकारियों से साफ कहा कि काम की मांग करने वाले किसी भी पात्र परिवार को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। सूखा प्रभावित तालुकों में रोजगार की मांग बढ़ने की संभावना है, क्योंकि बारिश की कमी का सीधा असर खेती और उससे जुड़े कामकाज पर पड़ा है। ऐसे में ग्रामीण मजदूरों और किसानों के लिए रोजगार गारंटी योजना महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है।

महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में इस समय पानी की कमी और सूखे जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार राज्य के 265 तालुक सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। पानी बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 16 अक्टूबर से शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में कम से कम 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने का भी निर्णय लिया है।

रोजगार गारंटी योजना मंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि सूखा प्रभावित गांवों में ऐसे काम तुरंत शुरू किए जाएं, जिनसे जल संग्रहण क्षमता बढ़े। इनमें खेत तालाब, छोटे बांध, जल संरक्षण संरचनाएं, सिंचाई संबंधी काम, मिट्टी संरक्षण और दूसरे ग्रामीण बुनियादी ढांचे के कार्य शामिल किए जा सकते हैं।

महाराष्ट्र सरकार पहले ही रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से ग्रामीण और सूखा प्रभावित इलाकों के लिए 6,728 करोड़ रुपये के काम उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर चुकी है। इसमें व्यक्तिगत लाभ के साथ करीब 375 प्रकार के सार्वजनिक कार्य शामिल हैं। इनमें सिंचाई, पशु शेड, फलोद्यान, प्रधानमंत्री आवास से जुड़े कार्य, तालाब, बांध, सड़क और ग्रामीण बाजार जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

सरकार की कोशिश है कि रोजगार योजना को केवल मजदूरी भुगतान तक सीमित न रखा जाए। इसके जरिए गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियां तैयार हों, कृषि की उत्पादकता बढ़े और भविष्य में सूखे का असर कम किया जा सके। जल संरक्षण और मिट्टी संरक्षण से जुड़े कामों को इसी वजह से प्राथमिकता देने को कहा गया है।

सूखे की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार कम होने का खतरा बढ़ जाता है। खेतों में काम घटने से कृषि मजदूरों के सामने आमदनी का संकट पैदा हो सकता है। ऐसे में समय पर सरकारी रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर मजदूर परिवार शहरों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। सरकार इस स्थिति को रोकने के लिए गांवों में ही पर्याप्त काम उपलब्ध कराने की रणनीति पर काम कर रही है।

गोगावले ने अधिकारियों को जिले और तालुका स्तर पर रोजगार की संभावित मांग का पहले से आकलन करने के निर्देश दिए हैं। जिन क्षेत्रों में खेती का नुकसान ज्यादा हुआ है या पानी की उपलब्धता कम है, वहां अतिरिक्त कार्य खोलने की तैयारी रखने को कहा गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर भी जरूरत के हिसाब से प्रस्ताव तैयार करने पर जोर दिया गया है।

VB-G RAM G व्यवस्था में समय पर मजदूरी भुगतान को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि योजना के तहत मजदूरी का भुगतान समय पर हो और काम उपलब्ध कराने में देरी न हो, इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगातार निगरानी की जा रही है। केंद्र ने 2026-27 के लिए इस योजना के तहत 95,692.31 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया है।

महाराष्ट्र सरकार का जोर अब इस बात पर है कि स्वीकृत राशि जमीन पर दिखाई दे। केवल कागजी मंजूरी या प्रस्ताव तैयार करने के बजाय वास्तविक काम शुरू हों और ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को रोजगार मिले। अधिकारियों से मजदूरों की मांग, उपलब्ध काम, मजदूरी भुगतान और निर्माण की प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बनाए रखने के लिए भी रोजगार योजना को अहम मान रही है। मजदूरी मिलने से ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति बनी रहती है, जिसका फायदा स्थानीय दुकानों, छोटे कारोबार और ग्रामीण बाजारों को भी मिलता है। इसलिए रोजगार सृजन को सूखा राहत की व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

जल संरक्षण से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता देने के पीछे एक दीर्घकालिक उद्देश्य भी है। खेत तालाब, बंधारे, मिट्टी संरक्षण और जल संचयन संरचनाओं से अगले मानसून में पानी रोकने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे भूजल स्तर को बेहतर करने और सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

सरकार के सामने अब चुनौती इस योजना को तेजी से जमीन पर उतारने की है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग बढ़ने से प्रशासन को समय पर काम स्वीकृत करना, तकनीकी मंजूरी देना और मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करना होगा। विभागीय समन्वय में देरी हुई तो योजना का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल भरत गोगावले ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता पर रखा जाए, काम मांगने वाले लोगों को तत्काल रोजगार दिया जाए और जल संरक्षण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले कामों के लिए विशेष एक्शन प्लान तैयार किया जाए। आने वाले दिनों में जिला स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर सरकार रोजगार और सूखा राहत से जुड़ी रणनीति की आगे समीक्षा करेगी।

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