महाराष्ट्र

विकास में असमानता कम हो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लाभ मोहन भागवत

Ratna Netam
29 Sept 2026 10:11 PM IST
विकास में असमानता कम हो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लाभ मोहन भागवत
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यवतमाल : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत में विकास हो रहा है, लेकिन समाज के सबसे ऊंचे और सबसे निचले स्तर पर मौजूद लोगों के बीच का अंतर जितना संभव हो उतना कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े देश और समाज में सभी लोगों का एक ही समय पर समान स्तर तक पहुंचना संभव नहीं हो सकता, लेकिन विकास की दिशा तय करते समय समाज के अंतिम व्यक्ति को केंद्र में रखा जाना चाहिए।
महाराष्ट्र के यवतमाल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने विकास, सामाजिक समानता और अंत्योदय की अवधारणा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित किया गया था। आयोजन यवतमाल के दारव्हा मार्ग स्थित चिंतामणि कृषि उपज बाजार परिसर में रखा गया था।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि देश में विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े समाज में यह अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं हो सकता कि हर व्यक्ति एक ही समय पर एक ही स्तर पर पहुंच जाए, लेकिन विकास की असमानता को कम से कम करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विकास के सबसे निचले और सबसे ऊंचे स्तर के बीच की दूरी जितनी कम होगी, समाज उतना ही संतुलित और मजबूत बनेगा। उनके अनुसार विकास का उद्देश्य केवल कुछ वर्गों की प्रगति नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें पीछे छूटे लोगों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।
भागवत ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ के विचार का जिक्र करते हुए कहा कि देश की खुशहाली का आकलन समाज के अंतिम व्यक्ति की स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज का आखिरी व्यक्ति जितना अधिक खुश और सुरक्षित होगा, देश की वास्तविक प्रगति भी उतनी ही मजबूत होगी। उन्होंने इसी सोच को अंत्योदय से जोड़ा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में ‘अंत्योदय’ यानी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान पर विशेष जोर रहा है। इस सोच के अनुसार आर्थिक और सामाजिक नीतियों का लाभ सबसे कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। भागवत ने अपने संबोधन में इसी सिद्धांत को मौजूदा विकास प्रक्रिया के संदर्भ में रखा।
उन्होंने संकेत दिया कि विकास को केवल आर्थिक आंकड़ों या बड़े बुनियादी ढांचे तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। समाज के अलग-अलग हिस्सों को विकास प्रक्रिया में शामिल करना और अवसरों की असमानता कम करना भी जरूरी है।
RSS प्रमुख ने कहा कि यदि विकास के लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित रह जाते हैं और समाज का बड़ा हिस्सा पीछे छूटता है तो असमानता बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि नीति और विकास की दिशा ऐसी होनी चाहिए जिससे सबसे कमजोर व्यक्ति भी आगे बढ़ सके।
भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में आर्थिक वृद्धि के साथ आय और अवसरों की असमानता को लेकर भी लगातार चर्चा होती रही है। हालांकि भागवत ने अपने संबोधन में किसी विशेष सरकारी नीति या योजना की आलोचना नहीं की, बल्कि विकास की व्यापक अवधारणा और उसके सामाजिक उद्देश्य पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सभी लोगों को बिल्कुल समान आर्थिक स्थिति में पहुंचाना संभव नहीं हो सकता, लेकिन समाज में मौजूद अत्यधिक अंतर को कम करने का प्रयास होना चाहिए। उनके मुताबिक विकास का लक्ष्य केवल शीर्ष स्तर को ऊपर ले जाना नहीं, बल्कि निचले स्तर पर मौजूद लोगों की स्थिति में भी लगातार सुधार करना होना चाहिए।
अपने संबोधन में भागवत ने दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि समाज और अर्थव्यवस्था में बदलाव के बावजूद अंतिम व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देने का सिद्धांत महत्वपूर्ण बना हुआ है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती हर साल 25 सितंबर को मनाई जाती है और इस अवसर को अंत्योदय की अवधारणा से भी जोड़ा जाता है। केंद्र सरकार की कई योजनाओं में भी दीनदयाल उपाध्याय के नाम और अंत्योदय की अवधारणा का इस्तेमाल किया गया है। उदाहरण के तौर पर दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित की जाती है।
यवतमाल के कार्यक्रम से पहले भी भागवत समाज के कमजोर वर्गों को मजबूत करने और विकास की प्रक्रिया में सभी को शामिल करने की बात करते रहे हैं। मंगलवार के संबोधन में उन्होंने इस विचार को सीधे विकास के ऊंचे और निचले स्तर के बीच अंतर कम करने से जोड़ा।
कार्यक्रम के दौरान दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान से जुड़े विभिन्न सामाजिक प्रकल्पों का भी उल्लेख किया गया। भागवत के यवतमाल दौरे में निलोना स्थित दीनदयाल प्रबोधिनी और जांब रोड पर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय से जुड़े स्मारक का अवलोकन भी कार्यक्रम का हिस्सा बताया गया था।
कुल मिलाकर मोहन भागवत ने अपने संबोधन में विकास को व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण से देखने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में विकास हो रहा है, लेकिन उसकी सफलता इस बात से भी तय होगी कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति की स्थिति कितनी बेहतर होती है। उनके अनुसार सभी को एक समान स्तर पर लाना व्यावहारिक रूप से संभव न भी हो, फिर भी समाज के सबसे ऊंचे और सबसे निचले स्तर के बीच की दूरी कम करना विकास का महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए।
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